भारत-तिब्बत समन्वय संघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर आयोजित वेबिनार सम्पन्न

लखनऊ। न्याय के संघर्ष में भारत सदैव तिब्बत के साथ खडा है। तिब्बत की आजादी केवल तिब्बत ही नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। यह बात तिब्बती मामलो के विशेषज्ञ बी आर कौंडल ने कही। श्री कौंडल भारत-तिब्बत समन्वय संघ द्वारा अंतरराष्ट्रीय न्याय दिवस पर तिब्बत के लिए न्याय विषयक वेबिनार में बोल रहे थे। देश-विदेश के 140 स्थानों से 232 लोगों की उपस्थिति में आयोजित इस वेबिनार में श्री कौंडल ने कहा कि भारत की तत्कालीन सरकार ने चीन को जो वीटो पावर दिलवाने सहयोग किया वो आज हमारे लिए महिषासुर बन चुका है।

तिब्बत को जेन्युन ऑटोनोमी का वादा किया गया था लेकिन वो वादा आज तक पूरा नहीं हुआ है। और हमे इस मांग को पूरा करवाने के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में जाना चाहिए। चीन ने कोरोना के माध्यम से पूरी दुनिया के खिलाफ जैविक युद्ध छेड़ा हुआ है। और पूरी दुनिया में चीन के खिलाफ माहौल बना हुआ है। भारत को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए और चीन के खिलाफ मुहिम छेड़नी चाहिए। तिब्बत के लोग तालिबान की तरह हिंसक नहीं अपितु शांतिप्रिय है इसलिए चीन उसका आज तक दुरूपयोग करता आ रहा है। अगर ये तिब्बती लोग भी हिंसक होते तो शायद अब तक आजादी हासिल कर चुके होते।

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष जस्टिस सुधीर कुमार सक्सेना ने कहा कि चीन तिब्बत के संसाधनों पर अनधिकृत कब्जा करके वहां के संसाधनों का भी शोषण कर रहा है। तिब्बत की बौद्ध संस्कृति पर प्रहार किया है जिससे हम भारत के समस्त सनातनी भी अत्यंत आहत अनुभव कर रहे हैं। प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय प्रभारी व संघ प्रचारक रामाशीष जी ने कहा कि लाल सेना की लद्दाख में की गई हिंसा कभी बिसराई नहीं जा सकती है। भारतवर्ष तिब्बत को हमेशा से अपना मानता रहा है। चीन केवल बौध्द के ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के अध्यात्म का शत्रु है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि भारत के लोग तिब्बत के न्याय के साथ हर स्तर पर खड़े हो और उनकी लड़ाई में उनका साथ दें।

हालांकि उन्होने तिब्बतियों को भी मुखर क्रान्ति करने में आगे-आगे चलने का आह्वान किया। उन्होंने इस बार दलाई लामा के जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी के बधाई संदेश वाले ट्वीट को चीन के विरुद्ध भारत की नीतिगत तैयारियों का संकेत बताया।
इस अवसर पर तिब्बतियन सुप्रीम जस्टिस कमीशन की पूर्व ज्यूरी व वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती नामग्याल सेकी ने कहा कि तिब्बत जिसे दुनिया की छत कहा जाता है, वह पूरी दुनिया से 1959 से राहत की उम्मीद लगा रहा है। आज चीन हमारी संस्कृति, भाषा, धार्मिक जीवन और आजादी हर जगह आधिपत्य जमा लेना चाहता है। तिब्बत में मानवाधिकारों का जो हनन किया जा रहा है उसका और कोई उदाहरण वर्तमान में कहीं और मिलना मुश्किल है।

उन्होंने कहा कि तिब्बती लोगों को समाप्त करने के लिए चीन हर तरह के हथकंडे अपना रहा है। चीन तिब्बती लोगों का सांस्कृतिक नरसंहार कर रहा है जो कि जैविक नरसंहार की तुलना में और भी बुरा है। सबसे बड़े दुर्भाग्य बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली में इस सांस्कृतिक नरसंहार को सम्बोधित करने के लिए उचित न्याय व्यवस्था मौजूद नहीं है। चीन की हरकतें अंतरराष्ट्रीय शांति और समृद्धि के लिए अत्यंत घातक है। चीन सुरक्षा परिषद् में मिले वीटो पॉवर का भी दुरूपयोग करता रहा है।

अधिवक्ता परिषद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व भारत-सरकार के एडीशनल सॉलिसिटर जनरल शशिप्रकाश सिंह ने कहा कि चीन ने तिब्बत के लोगों पर छोटी छोटी घटनाओं को लेकर अत्याचार किया है,यही अत्याचार अभी भी बदस्तूर जारी है। तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे सैकड़ों लोगों को आजीवन कारावास और मृत्युदंड जैसे जघन्य अत्याचार अभी भी किये जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय फोरम में हमें इसे प्रमुखता से उठाना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केवल भारत ही इसका समाधान दे सकता है,भारत में ही यह सामर्थ्य है कि वह पूरे विश्व के साथ मिलकर इस तिब्बत की आजादी का समाधान कर सकता है।

अधिवक्ता परिषद के उत्तर प्रदेश के कार्यकारी महामन्त्री अश्वनी कुमार त्रिपाठी नेअपने उद्बोधन में आत्मनिर्णय को तिब्बतियों का अधिकार बताते हुए कहा कि हमें तिब्बत के लोगों के इस संघर्ष में सहयोगी बनकर तिब्बत के लिए इंटरनेशनल कोर्ट में जाना होगा। उन्होंने कहा कि तिब्बत की जमीन के नीचे सोने का बहुत बड़ा भंडार है जिस कारण चीन इसके द्वारा दुनियाँ की अर्थव्यवस्था को खत्म कर देना चाहता है। भारत सहित समूचे विश्व में इस समय जैसा माहौल बन रहा है उसके चलते चीन अपनी कुत्सित योजना में कभी सफल नहीं हो पाएगा।

वेबिनार का संचालन भारत तिब्बत समन्वय संघ के विधि विभाग के राष्ट्रीय संयोजक अनीश श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया और धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय महामंत्री विजय मान ने किया। आज के आयोजन में केंद्रीय संयोजक हेमेंद्र तोमर, राष्ट्रीय महामंत्री अरविंद केसरी, अंतरराष्ट्रीय प्रभाग के राष्ट्रीय संयोजक डॉ अमरीक सिंह ठाकुर, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष अजीत अग्रवाल, अखिलेश पाठक और मनोज गहतड़ी का विशेष सहयोग रहा।

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