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करदाताओं के लिए “पारदर्शी कराधान” ईमानदार का सम्मान’ -नरेंद्र मोदी

वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से होने वाले इस आयोजन में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर भी उपस्थित हैं। इसके अलावा आयकर विभाग के अधिकारियों एवं पदाधिकारियों के अलावा विभिन्न वाणिज्य मंडलों, व्यापार संघों एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट संघों के साथ-साथ जाने-माने करदाता भी इस आयोजन में शामिल हुए हैं। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईमानदारी से कर चुकाने वाले करदाताओं के लिए ‘पारदर्शी कराधान – ईमानदार का सम्मान’ नामक एक मंच का शुभारंभ किया है। पीएम मोदी कई मौकों पर ईमानदार करदाताओं की तारीफ तो करते रहे हैं, लेकिन इस बार उन्होंने ऐसे करदाताओं के लिए एक बड़ा प्रोग्राम शुरू किया है।

देश में चल रहा संरचनात्मक सुधार का सिलसिला आज एक नए पड़ाव पर पहुंचा है। ‘पारदर्शी कराधान – ईमानदार का सम्मान’ 21वीं सदी के टैक्स सिस्टम की इस नई व्यवस्था का आज लोकार्पण किया गया है। स प्लेटफॉर्म में फेसलेस एसेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर्स चार्टर जैसे बड़े रिफॉर्म्स हैं। फेसलेस एसेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर आज से लागू कर दिया गया है। 
फेसलेस अपील की सुविधा 25 सितंबर यानि दीन दयाल उपाध्याय जी के जन्मदिन से पूरे देशभर में नागरिकों के लिए उपलब्ध हो जाएगी। अब टैक्स सिस्टम भले ही फेसलेस हो रहा है, लेकिन टैक्सपेयर को ये फेयरनेस और फेयरलेसनेस का विश्वास देने वाला है।मानदार का सम्मान। देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। जब देश के ईमानदार टैक्सपेयर का जीवन आसान बनता है, वो आगे बढ़ता है, तो देश का भी विकास होता है, देश भी आगे बढ़ता है। ज से शुरू हो रहीं नई व्यवस्थाएं, नई सुविधाएं, मिनिमम गवर्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती हैं। ये देशवासियों के जीवन से सरकार को, सरकार के दखल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। 
भारत के टैक्स सिस्टम में मौलिक और संरचनात्मक सुधार की आवश्यकता इसलिए थी क्योंकि हमारा आज का ये सिस्टम गुलामी के कालखंड में बना और फिर धीरे धीरे विकसित हुआ। आजादी के बाद इसमें शामिल होने के लिए बहुत कुछ किया गया था, लेकिन सबसे अजीब प्रणाली का चरित्र यही रहा। आजादी के बाद इसमें यहां वहां थोड़े बहुत परिवर्तन किए गए, लेकिन बड़े तौर पर सिस्टम का ढांचा वही रहा। 

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