महामारी से पहले चेतावनी: कैसे Artificial Intelligence भविष्य की बीमारियों को रोकने में मदद कर रहा है
कोविड-19 ने पूरी दुनिया को यह एहसास करा दिया कि अगली महामारी कभी भी आ सकती है। फर्क सिर्फ इतना होगा कि हम कितने तैयार हैं। अब सवाल यह नहीं है कि बीमारी आएगी या नहीं, बल्कि यह है कि हम उसे पहचानने और रोकने में कितने तेज होंगे। इसी जगह पर Artificial Intelligence यानी AI एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है।
आज AI सिर्फ मोबाइल ऐप या कैमरे तक सीमित नहीं है। यह अब बीमारियों की शुरुआती आहट सुनने लगा है।
जब बीमारी दिखाई नहीं देती, तब भी AI उसे पकड़ लेता है
पुराना सिस्टम तब जागता था जब लोग अस्पतालों में लाइन लगाने लगते थे। तब तक वायरस काफी दूर तक फैल चुका होता था।
AI इसमें गेम बदल देता है। यह लोगों की आवाजाही, फ्लाइट डेटा, मौसम में बदलाव, जानवरों में फैल रही बीमारियां और ऑनलाइन खबरों तक को साथ में पढ़ता है। इन सब से यह अंदाजा लगाता है कि कहीं कोई नया संक्रमण तो धीरे-धीरे पैर नहीं पसार रहा।
यानी बीमारी दिखाई दे उससे पहले ही सिस्टम अलर्ट होने लगता है।
बीमारी कितनी दूर जाएगी, यह भी पहले से बताया जा सकता है
मान लीजिए किसी शहर में अचानक मरीज बढ़ने लगे। अब सवाल होता है — क्या ये रुक जाएगा या पूरे देश में फैलेगा?
AI इसी का जवाब देता है। यह आंकड़ों से यह समझता है कि लोग कितना घूम रहे हैं, अस्पताल कितने मजबूत हैं और नियम कितने सख्त हैं। फिर वह अनुमान लगाता है कि अगले हफ्तों में स्थिति कैसी हो सकती है।
कोविड के समय कई जगह इसी तरह की भविष्यवाणियों से सरकारों ने समय रहते फैसले लिए।
अगली बीमारी कौन-सी हो सकती है, इस पर भी नजर
दुनिया के जंगलों और जानवरों में लाखों वायरस मौजूद हैं। कुछ अभी इंसानों तक नहीं पहुंचे हैं, लेकिन भविष्य में खतरा बन सकते हैं।
AI इन वायरस के genetic pattern, पर्यावरण और जानवरों के व्यवहार को देखकर यह समझने की कोशिश करता है कि कौन-सा वायरस इंसानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। इसी तैयारी को वैज्ञानिक भाषा में “Disease X” कहा जाता है।
हेल्थ सिस्टम अब डिजिटल हो रहा है
अब कई देश अपने अस्पतालों और सरकारी सिस्टम को AI से जोड़ रहे हैं। इसका मतलब है कि डेटा जल्दी पहुंचेगा, फैसले जल्दी होंगे और इलाज की तैयारी पहले से हो जाएगी।
जब कोई नई बीमारी कहीं भी उभरती है, तो AI आधारित सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज सकता है।
लेकिन फैसला इंसान ही करता है
AI कितना भी तेज क्यों न हो, डॉक्टर और वैज्ञानिकों की जगह नहीं ले सकता। मशीन डेटा देती है, लेकिन समझ, अनुभव और संवेदनशीलता इंसान के पास होती है।
AI का सही रोल है — इंसानों को मजबूत बनाना, कमजोर नहीं।
सबसे बड़ा खतरा गलत जानकारी
आज की दुनिया में बीमारी से ज्यादा तेज गलत खबरें फैलती हैं। अगर झूठी बातें ज्यादा वायरल हों, तो लोग डर जाते हैं या इलाज पर भरोसा नहीं करते।
इसलिए AI का इस्तेमाल जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना बहुत जरूरी है।



