Lucknow में छात्रवृत्ति वितरण: योगी आदित्यनाथ का अखिलेश पर तंज, बोले– गरीबों की चिंता उन्हें नहीं
Lucknow के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जरूरतमंद छात्रों को बड़ी सौगात दी। वित्तीय वर्ष 2025–26 के तहत 18,78,726 छात्र-छात्राओं के खातों में सीधे ₹944.55 करोड़ की राशि ट्रांसफर की गई।
इस मौके पर सीएम योगी ने न सिर्फ शिक्षा योजनाओं पर बात की, बल्कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी अप्रत्यक्ष रूप से तीखा हमला बोला।
अखिलेश पर तंज, बोले – जो दिन में 12 बजे उठते हैं…
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि
“जो नेता दिन में 12 बजे सोकर उठते हैं, उन्हें गरीबों और जरूरतमंदों की चिंता कैसे होगी?”
उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय शिक्षा व्यवस्था बंजर हो चुकी थी और नकल का अड्डा बन गई थी। छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं भी जरूरतमंद बच्चों तक नहीं पहुंच पाती थीं।
परिवारवाद और भ्रष्टाचार पर हमला
योगी ने आरोप लगाया कि पहले परिवारवाद और भ्रष्टाचार के चलते छात्रवृत्ति का पैसा बीच में ही गायब हो जाता था। कुछ माफिया और दलाल युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि अब सरकार की नीयत साफ है, इसलिए गरीबों और छात्रों का हक सीधे उनके खाते में पहुंच रहा है।
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डीबीटी सिस्टम की जमकर तारीफ
मुख्यमंत्री ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम की सराहना करते हुए कहा कि यह व्यवस्था पारदर्शी है और भ्रष्टाचार को खत्म करने में कारगर साबित हुई है।
“जब सरकार ईमानदारी से काम करती है, तो एक-एक पैसा सही हाथों में पहुंचता है,” योगी ने कहा।
शिक्षा में सुधार और नई योजनाएं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
ऑपरेशन कायाकल्प
कस्तूरबा गांधी विद्यालय
अटल आवासीय विद्यालय
अभ्युदय कोचिंग योजना
खेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास
उन्होंने कहा कि बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता है और छात्रवृत्ति योजना से आगे बढ़ने वाले छात्र इसका जीता-जागता उदाहरण हैं।
अखिलेश यादव का पलटवार
सीएम योगी के बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘X’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री झूठ का प्रपंच फैला रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के कार्यकाल में शिक्षक और शिक्षा मित्र आंदोलित रहे, स्कूल बंद हुए और शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई।
अखिलेश ने यह भी कहा कि भाजपा के एजेंडे में शिक्षा का कोई स्थान नहीं है, क्योंकि शिक्षित समाज सवाल करता है और सत्ता से जवाब मांगता है।
लखनऊ का यह छात्रवृत्ति कार्यक्रम सिर्फ आर्थिक मदद का नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का भी मंच बन गया, जहां शिक्षा, योजनाओं और सरकार की नीयत पर तीखी टक्कर देखने को मिली।



