New Delhi News-भारत ने गाजा, सीरिया, लेबनान और यमन में शांति स्थापना पर दिया ज़ोर

New Delhi News-भारत ने मध्य-पूर्व के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों गाजा, सीरिया, लेबनान और यमन में हिंसा समाप्त कर शांति बहाल करने की जोरदार वकालत की है। भारत ने स्पष्ट किया कि निरंतर संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही ऐसे टिकाऊ समाधान निकल सकते हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव आम लोगों के जीवन और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़े।

न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में मध्य-पूर्व की स्थिति पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारत एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीन के गठन के अपने समर्थन पर कायम है। साथ ही भारत ने सीरिया के नेतृत्व वाली और सीरिया के स्वामित्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया को समर्थन देने की बात भी दोहराई।

गाजा के मुद्दे पर राजदूत हरीश ने कहा कि भारत गाजा संघर्ष समाप्त करने के उद्देश्य से यूएनएससी प्रस्ताव 2803 के क्रियान्वयन में हुई हालिया प्रगति को गंभीरता से नोट करता है। उन्होंने इस लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के समाधान की दिशा में प्रयासों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका की सराहना भी की।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन द्वारा जारी बयान के अनुसार, हरीश ने कहा कि गाजा का पुनर्निर्माण, आर्थिक पुनरुद्धार, सार्वजनिक सेवाओं की बहाली और मानवीय सहायता की आपूर्ति एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को निरंतर सहयोग और प्रतिबद्धता दिखानी होगी, ताकि फिलिस्तीनी जनता के दुख-दर्द को कम किया जा सके।

उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत ने करीब 135 मीट्रिक टन दवाइयां और राहत सामग्री गाजा के लिए भेजी है। इसके अलावा 40 मिलियन डॉलर की भारतीय परियोजनाएं विभिन्न चरणों में क्रियान्वयनाधीन हैं। कुल मिलाकर फिलिस्तीनी लोगों को 170 मिलियन डॉलर से अधिक की सहायता भारत द्वारा प्रदान की जा रही है।

सीरिया के संदर्भ में भारतीय राजनयिक ने कहा कि भारत सीरियाई जनता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और मानवीय सहायता, आवश्यक आपूर्ति तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से सहयोग करता रहेगा। यूएनडीओएफ में तीसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में भारतीय शांति सैनिकों ने अपने दायित्वों के निर्वहन में दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण का परिचय दिया है।

लेबनान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत वहां शांति, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। 1998 से यूएनआईएफआईएल में 900 से अधिक भारतीय सैनिक तैनात हैं। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि शांति सैनिकों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

यमन के संबंध में हरीश ने कहा कि भारत वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ यमनी जनता के लिए मानवीय सहायता अभियानों को और बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देता है। दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, टीकों और खाद्य आपूर्ति के साथ-साथ क्षमता निर्माण और शैक्षिक छात्रवृत्तियों के माध्यम से भारत की सहायता ने यमन के लोगों की कठिनाइयों को कम करने में मदद की है।

रिपोर्ट – शाश्वत तिवारी

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