Menstrual Cycle: मासिक धर्म भी जीवन का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, स्कूलों को मिले सख्त निर्देश
Menstrual Cycle: भारत में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि मासिक धर्म से जुड़ा स्वास्थ्य भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है। यानी अब यह सिर्फ स्वास्थ्य या सुविधा का मामला नहीं, बल्कि मूल अधिकार बन चुका है। कोर्ट का यह फैसला देश भर के लाखों स्कूली छात्राओं के लिए राहत की खबर है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि अगर स्कूलों में सेनेटरी पैड, साफ और अलग टॉयलेट तथा सुरक्षित निपटान की व्यवस्था नहीं होती, तो इससे लड़कियों की गरिमा, शिक्षा और आत्मसम्मान पर सीधा असर पड़ता है। कई जगहों पर इन्हीं वजहों से छात्राएं स्कूल छोड़ने तक को मजबूर हो जाती हैं।
कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीन महीने के भीतर सरकारी और निजी दोनों तरह के स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन यानी एमएचएम व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया है। इसके तहत हर स्कूल में लड़कियों के लिए अलग और काम करने वाले टॉयलेट, फ्री सेनेटरी नैपकिन और आपात स्थिति के लिए जरूरी सामान रखना अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि स्कूलों में ऐसे कोने बनाए जाएं जहां लड़कियों को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कपड़े, पैड और डिस्पोजल बैग मिल सकें। साथ ही दिव्यांग छात्राओं की जरूरतों का भी खास ध्यान रखा जाए।
इस फैसले में यह भी तय किया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी हर साल स्कूलों का निरीक्षण करेंगे और नियमों का पालन न करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता तक रद्द हो सकती है। एनसीईआरटी और राज्य बोर्डों को पाठ्यक्रम में मासिक धर्म से जुड़ी जानकारी शामिल करने का निर्देश भी दिया गया है ताकि शर्म और झिझक खत्म हो।
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कोर्ट ने सरकार को यह जिम्मेदारी भी दी है कि सेनेटरी पैड की उपलब्धता की जानकारी सोशल मीडिया, अखबार और सार्वजनिक प्रचार के जरिए फैलायी जाए, ताकि कोई भी लड़की जानकारी के अभाव में पीछे न रह जाए।
यह मामला एक जनहित याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें मांग की गई थी कि कक्षा 6 से 12 तक की छात्राओं को मुफ्त सेनेटरी नैपकिन और सही टॉयलेट सुविधाएं मिलें। अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूरे देश में लागू करने का रास्ता साफ कर दिया है।
कुल मिलाकर यह फैसला सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि समाज की सोच बदलने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर इसे सही तरीके से जमीन पर उतारा गया, तो यह लाखों लड़कियों की शिक्षा, सेहत और आत्मसम्मान को मजबूत करने वाला साबित होगा।



