Special Sarson  Saag Recipe: सरसों का साग: सर्दियों का सुपरफूड, स्वाद और सेहत का देसी खजाना

जानिए कैसे बनता है पारंपरिक सरसों का साग, इसके पोषण लाभ क्या हैं और क्यों मक्के की रोटी के साथ इसका स्वाद हो जाता है दोगुना

Special Sarson  Saag Recipe: सर्दियों का मौसम आते ही भारतीय रसोई में एक खास डिश की खुशबू फैलने लगती है और वह है सरसों का साग। खासकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह व्यंजन सर्दियों की पहचान माना जाता है। मक्के की रोटी, ऊपर से ताजा सफेद मक्खन, साथ में गुड़ और प्याज—यह पूरा कॉम्बिनेशन न सिर्फ पेट भरता है बल्कि दिल भी खुश कर देता है। सरसों का साग सिर्फ एक पारंपरिक डिश नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक भी है।

सरसों का साग कैसे बनाया जाता है?

  

सरसों का साग बनाने के लिए सबसे पहले ताजी और हरी सरसों की पत्तियां ली जाती हैं। कई लोग स्वाद को संतुलित करने के लिए इसमें पालक और बथुआ भी मिला देते हैं। पत्तियों को अच्छी तरह साफ कर कई बार पानी से धोया जाता है ताकि मिट्टी या कड़वाहट कम हो जाए। इसके बाद इन्हें मोटा-मोटा काट लिया जाता है।

एक बड़े बर्तन या प्रेशर कुकर में सरसों की पत्तियां, थोड़ा पानी, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च डालकर पकाया जाता है। जब पत्तियां अच्छी तरह गल जाएं तो इन्हें मथनी या मिक्सर की मदद से दरदरा पीस लिया जाता है। पारंपरिक तरीके में इसे लकड़ी की मथनी से घोटा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

अब कड़ाही में घी या देशी मक्खन गर्म किया जाता है। इसमें जीरा, हींग, बारीक कटा प्याज और टमाटर डालकर मसाला भुना जाता है। जब मसाला अच्छी तरह पक जाए तो उसमें पिसा हुआ साग मिलाया जाता है। गाढ़ापन लाने के लिए थोड़ा सा मक्के का आटा मिलाया जाता है और धीमी आंच पर इसे कुछ देर पकने दिया जाता है। ऊपर से मक्खन डालते ही इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।

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सरसों के साग के पोषण और स्वास्थ्य लाभ

सरसों की पत्तियां पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। इसमें विटामिन A, C और K प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो आंखों, त्वचा और हड्डियों के लिए फायदेमंद हैं। इसमें आयरन और कैल्शियम भी होता है, जो खून की कमी दूर करने और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है।

सर्दियों में सरसों का साग खाने से शरीर को प्राकृतिक गर्माहट मिलती है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। इसके एंटीऑक्सीडेंट तत्व इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं, जिससे सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से बचाव होता है।

जो लोग वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं, उनके लिए भी यह अच्छा विकल्प है क्योंकि यह पोषण से भरपूर होते हुए भी ज्यादा भारी नहीं होता।

स्वाद कैसा होता है?

सरसों का साग हल्का तीखा और हल्की कड़वाहट लिए होता है, जो पकने के बाद बेहद संतुलित और स्वादिष्ट बन जाता है। जब इसे मक्के की गरम-गरम रोटी के साथ खाया जाता है, तो इसका स्वाद और भी निखर जाता है। ऊपर से मक्खन की मलाईदार परत और साथ में गुड़ का मीठापन इसे परफेक्ट कॉम्बिनेशन बना देता है।

ग्रामीण इलाकों में इसे अक्सर मिट्टी के बर्तन में चूल्हे पर पकाया जाता है, जिससे इसमें एक खास देसी खुशबू आती है। यही वजह है कि यह डिश सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपरा से भी जुड़ी हुई है।

आज के समय में भले ही पिज्जा, बर्गर और फास्ट फूड का ट्रेंड बढ़ गया हो, लेकिन सरसों का साग अब भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यह एक ऐसा व्यंजन है जो स्वाद, सेहत और संस्कृति—तीनों का बेहतरीन संगम है।

Written By: Anushri yadav

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