International News: भारत में Rare Earth Elements: चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति

कौन-से हैं Rare Earth Elements, इनके उपयोग, वैश्विक भंडार और भारत की नई पहल

International News:  रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements) आज की दुनिया की सबसे अहम धातुएं बन चुकी हैं। इन्हें कभी-कभी Rare Earth Metals या Rare Earth Minerals भी कहा जाता है। इनकी जरूरत सिर्फ उद्योग या तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस चीज में इस्तेमाल होती हैं, जो हमारी आधुनिक जिंदगी को आसान बनाती है।

Rare Earth Elements का महत्व

रेयर अर्थ एलिमेंट्स स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप, गैजेट, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल, विमानों के इंजन, मेडिकल इंस्ट्रूमेंट, तेल की रिफाइनिंग और यहां तक कि मिसाइल और रडार सिस्टम में भी इस्तेमाल होते हैं। इन धातुओं के बिना आज की तकनीक और ग्रीन एनर्जी इंडस्ट्री अधूरी है।

भारत की हालिया पहल और ब्राजील डील

भारत ने हाल ही में ब्राजील के साथ Critical Minerals और Rare Earth Elements को लेकर महत्वपूर्ण समझौता किया है। 21 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डा सिल्वा की मौजूदगी में यह डील साइन की गई। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीधी सप्लाई चेन को मजबूत करना और चीन पर निर्भरता को कम करना है।

Pax Silica Alliance और वैश्विक गठबंधन

भारत ने 20 फरवरी 2026 को अमेरिका का Pax Silica Alliance भी जॉइन किया। इस गठबंधन में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इजरायल, जापान, कतर, साउथ कोरिया, सिंगापुर, UAE और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। यह गठबंधन AI और Rare Earth Elements की सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है। अन्य देशों जैसे कनाडा, यूरोपीय संघ, नीदरलैंड्स, ताइवान और OECD ने भी इस प्रयास से जुड़कर सहयोग किया है।

चीन का दबदबा और वैश्विक चुनौती

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के वैश्विक बाजार में चीन का दबदबा सबसे बड़ा है। दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत Rare Earth Elements चीन के पास हैं। चीन न केवल इन्हें खनन करता है, बल्कि प्रोसेसिंग और वैश्विक सप्लाई का नियंत्रण भी करता है। अप्रैल 2025 में चीन ने कुछ Rare Earth Elements के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी, जिससे पूरी दुनिया में ऑटोमोबाइल, ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री प्रभावित हुई। भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल और डिफेंस सेक्टर पर भी असर पड़ा।

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Rare Earth Elements की सूची

Rare Earth Elements लैंथेनाइड्स ग्रुप के होते हैं और अत्यंत दुर्लभ माने जाते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • लैंथेनम (La), सेरियम (Ce), प्रेसियोडिमियम (Pr), नियोडिमियम (Nd), प्रोमेथियम (Pm), समैरियम (Sm), यूरोपियम (Eu), गैडोलीनियम (Gd), टेरबियम (Tb), डिस्प्रोसियम (Dy), होल्मियम (Ho), अर्बियम (Er), थ्यूलियम (Tm), येटरबियम (Yb), ल्यूटेटियम (Lu)।

  • इसके अलावा स्कैंडियम (Sc) और यट्रियम (Y) भी Rare Earth Elements की श्रेणी में आते हैं।

वैश्विक भंडार और भारत की स्थिति

US Geological Survey (जनवरी 2025) के अनुसार दुनिया में कुल 9 करोड़ टन Rare Earth Elements मौजूद हैं।

  • चीन: 4.4 करोड़ टन

  • ब्राजील: 2.1 करोड़ टन

  • भारत: 69 लाख टन

  • अन्य देश: ऑस्ट्रेलिया, रूस, वियतनाम, अमेरिका

हालांकि भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है, लेकिन उत्पादन में चीन के मुकाबले बहुत पीछे है। 2024 में भारत ने सिर्फ 2,900 टन उत्पादन किया, जबकि चीन ने 2.7 लाख टन Rare Earth Elements उत्पादित किए।

भारत की रणनीति और भविष्य

भारत सरकार ने ‘National Critical Mineral Mission’ की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत 2031 तक 1,200 जगहों पर सर्वे किया जाएगा और 30 प्रमुख खनिज भंडारों की पहचान कर Rare Earth Elements की माइनिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स भी स्थापित किए जाएंगे।

इस तरह भारत चीन पर अपनी निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थान बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।

Written By: Anushri yadav

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