मऊ। राहुल सांकृत्यायन बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, उनका साहित्य आज भी प्रेरणास्रोत — ऋषिकेश पांडे

जन्मदिवस पर ब्राह्मण विकास परिषद द्वारा महान साहित्यकार को किया गया नमन

मऊ। ब्राह्मण विकास परिषद जनपद मऊ के जिला अध्यक्ष ऋषिकेश पांडे ने महान साहित्यकार एवं चिंतक राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिवस के अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने लेखन के क्षेत्र में लगभग सभी विधाओं पर महत्वपूर्ण कार्य किया और अपने ज्ञान, अनुभव तथा शोध के माध्यम से भारतीय साहित्य और इतिहास को समृद्ध किया।

ब्राह्मण विकास परिषद जिला अध्यक्ष ने बताया कि राहुल सांकृत्यायन ने पुरातत्व, इतिहास, हिंदी साहित्य का इतिहास, संस्कृत एवं मध्य एशिया के इतिहास जैसे विषयों पर गंभीर अध्ययन और लेखन किया। उनकी प्रसिद्ध कृति “मेरी जीवन यात्रा” के भाग 1 से 5 तक की रचनाएं आत्मकथा के रूप में कालजयी मानी जाती हैं, जो आज भी पाठकों और शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक हैं।

उन्होंने कहा कि राहुल सांकृत्यायन का घुमक्कड़ी और यायावरी जीवन उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता थी। यायावरी का बीज उन्हें अपने नाना से मिला था, जो ब्रिटिश काल में सैनिक थे, जबकि संस्कार उन्हें अपने पिता से प्राप्त हुए। उन्होंने जीवन में वैष्णव, आर्य समाज, बौद्ध तथा वामपंथी विचारधाराओं सहित विभिन्न मतों को समझा और स्वीकार किया, जो उनकी व्यापक सोच और उदार दृष्टिकोण को दर्शाता है।

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बताया गया कि उनके पिता स्वर्गीय गोवर्धन पांडे तथा माता कुलवंती देवी की वे सबसे बड़ी संतान थे। उनका मूल नाम केदारनाथ पांडेय था, लेकिन बौद्ध धर्म स्वीकार करने के पश्चात अपने सांकृत गोत्र के आधार पर उन्होंने अपने नाम के साथ सांकृत्यायन शब्द जोड़ लिया। उनका पैतृक ग्राम कनैला आज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है और देश-विदेश में उनकी पहचान एक महान विद्वान एवं साहित्यकार के रूप में स्थापित है।

अंत में ऋषिकेश पांडेय ने कहा कि राहुल सांकृत्यायन का जीवन संघर्ष, ज्ञान और निरंतर सीखने की प्रेरणा देता है। उनकी रचनाएं आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान और विचार की नई दिशा प्रदान करती रहेंगी।

जिला संवाददाता- एक संदेश मऊ

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