AYODHYA-RAM-MANDIR-कर्मयोगिनी माता अहिल्या का राम जन्मभूमि परिसर में हुआ मंचन
AYODHYA-RAM-MANDIR-लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” महानाट्य ने दर्शकों के सम्मुख उनके प्रेरणास्पद जीवन, त्याग, सेवा और सुशासन की जीवंत एवं भावपूर्ण प्रस्तुति की। यह भव्य मंचन भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में अंगद टीला परिसर में आयोजित किया गया।
महानाट्य ने माता अहिल्याबाई होल्कर के लोककल्याणकारी दृष्टिकोण, सामाजिक समरसता, न्यायप्रिय शासन एवं नैतिक नेतृत्व को इस प्रकार प्रस्तुत किया कि दर्शक गहन चिंतन के लिए विवश हो गए। मंचन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि भारतीय दर्शन में नारी शक्ति को कभी कमतर नहीं आँका गया, बल्कि नारी सदैव शक्ति स्वरूपा और पूज्य रही है। नारी सशक्तिकरण की अवधारणा भारतीय संस्कृति में आदिकाल से विद्यमान रही है।
नाट्य प्रस्तुति में अहिल्याबाई के बाल्यकाल से लेकर सम्पूर्ण शासनकाल तक की जीवन-यात्रा को सजीव रूप में दर्शाया गया। बचपन से ही निर्भीक और मस्तमौली अहिल्या, उनके माता-पिता मनकोजी शिंदे एवं सुशीला शिंदे, विवाह, ससुर मल्हार राव होल्कर द्वारा राज्यकार्य में सहभागिता, पति खांडेराव होल्कर की वीरगति, तथा बाद में अहिल्याबाई द्वारा सिंहासन स्वीकार कर एक कर्मयोगी शासक के रूप में न्यायोचित शासन का आरंभ—इन सभी प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर उकेरा गया।
महानाट्य में यह भी दर्शाया गया कि किस प्रकार अहिल्याबाई होल्कर ने अनेक चुनौतियों के बावजूद मंदिरों, धर्मशालाओं, सरायों का निर्माण कराया और जनहित के कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। भारतीय रंगमंच की शास्त्रीय परंपराएं, लोकनृत्य, भावपूर्ण संवाद, सजीव संगीत और प्रभावशाली मंच-सज्जा ने इस प्रस्तुति को अत्यंत भावनात्मक एवं प्रेरणादायी बना दिया।
सीसीआरटी की इस प्रस्तुति को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, ऐतिहासिक स्मृति के संवर्धन तथा समाज में कर्मयोग, सेवा और नैतिक मूल्यों के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा गया। मंचन में पार्श्व संगीत एवं संवादों के लिए पूर्व संकलित ध्वनि (रिकॉर्डेड वॉइस) का अत्यंत प्रभावी उपयोग किया गया, जो कलाकारों के अभिनय के साथ पूर्ण सामंजस्य में रहा।
महानाट्य में सारा शर्मा ने माता अहिल्याबाई होल्कर, प्रियंका वर्मा ने बाल्यकाल की अहिल्या, कनक वर्मा ने गौतमबाई होल्कर, आदित्य वर्मा ने माले राव होल्कर, सिद्धार्थ ने मल्हार राव होल्कर तथा पियूष गंभीर ने खांडेराव होल्कर की भूमिका निभाई। लगभग 40 कलाकारों ने मंच पर सशक्त अभिनय से प्रस्तुति को जीवंत बनाया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि ट्रस्ट महासचिव चम्पतराय ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, विहिप केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय के निदेशक संजीब सिंह, उमेश पोरवाल, धनंजय, रमाशंकर टिन्नू सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
महानाट्य की संकल्पना एवं निर्देशन सीसीआरटी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर, लेखिका व सह-क्षेत्राधिकारी डॉ. जुलेशा सिद्धार्थ, क्षेत्राधिकारी देवाराम मेघवाल के मार्गदर्शन में हुआ। कार्यक्रम समन्वयक उप-निदेशक आशुतोष एवं उप-निदेशक भगवान वर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
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