Bengal Politics: अमित शाह का ‘बंगाल मिशन’ शुरू ,ममता के दुर्ग को भेदना क्यों है बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती?

Bengal Politics: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की भले ही अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन सियासी सरगर्मी तेज हो चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल चुनाव की कमान अपने हाथों में लेते हुए ममता बनर्जी के गढ़ को भेदने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।

बीजेपी लंबे समय से बंगाल में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रही है, लेकिन यह लड़ाई आसान नहीं मानी जा रही। ममता बनर्जी की मजबूत जमीनी पकड़, तृणमूल कांग्रेस का संगठित कैडर और क्षेत्रीय भावनाएं बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

बीजेपी के सामने मुख्य मुश्किलें

  • ममता की मजबूत छवि: ममता बनर्जी खुद को ‘बंगाल की बेटी’ के रूप में स्थापित कर चुकी हैं।

  • TMC का कैडर नेटवर्क: बूथ स्तर पर टीएमसी की पकड़ बेहद मजबूत है।

  • क्षेत्रीय बनाम बाहरी मुद्दा: बीजेपी को अक्सर ‘बाहरी पार्टी’ के तौर पर पेश किया जाता है।

  • अल्पसंख्यक वोट बैंक: ममता को मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा समर्थन मिलता है।

  • नेतृत्व का सवाल: बीजेपी अब तक बंगाल में कोई सर्वमान्य चेहरा खड़ा नहीं कर पाई है।

बीजेपी की रणनीति

अमित शाह संगठन को मजबूत करने, हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों को धार देने और केंद्र सरकार की योजनाओं को बंगाल तक पहुंचाने पर फोकस कर रहे हैं। साथ ही टीएमसी सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और हिंसा जैसे मुद्दों को चुनावी हथियार बनाया जा रहा है।

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