चैत्र नवरात्रि Kalash Visarjan 2026: कलश विसर्जन का सही समय, विधि और मंत्र जानें

चैत्र नवरात्रि Kalash Visarjan 2026: Chaitra Navratri के समापन के साथ ही मां दुर्गा को विधिवत विदाई दी जाती है। यह प्रक्रिया चैत्र शुक्ल दशमी तिथि को होती है। वर्ष 2026 में नवरात्रि का समापन 28 मार्च को माना जा रहा है, इसलिए इसी दिन कलश विसर्जन करना शुभ रहेगा।

कलश विसर्जन मुहूर्त 2026

ज्योतिषीय गणना के अनुसार दशमी तिथि 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 8 मिनट से शुरू हो रही है, लेकिन 28 मार्च को सूर्योदय के समय दशमी तिथि विद्यमान रहने के कारण इसी दिन व्रत पारण और कलश विसर्जन करना श्रेष्ठ माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि सुबह 8 बजकर 46 मिनट तक कलश विसर्जन करना सबसे शुभ रहेगा, क्योंकि इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा।

कलश विसर्जन की विधि

कलश विसर्जन की प्रक्रिया बेहद श्रद्धा और नियमों के साथ की जाती है। सबसे पहले कलश के ऊपर स्थापित नारियल को सावधानी से हटाया जाता है। इसके बाद जौ या जयंती को काटकर अलग किया जाता है। कलश में रखा पवित्र जल आम के पत्तों की सहायता से पूरे घर में छिड़का जाता है, जिससे वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

इसके बाद कलश में रखी गई अन्य सामग्रियों को जल में विसर्जित किया जाता है। यदि कलश मिट्टी का है तो उसे भी जल में प्रवाहित कर दिया जाता है, जबकि धातु के कलश को साफ करके पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मां दुर्गा का ध्यान करते हुए विसर्जन किया जाता है।

कलश विसर्जन मंत्र 

कलश विसर्जन के समय इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है—

“गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थानं परमेश्वरी, पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।” इस मंत्र के माध्यम से भक्त मां दुर्गा से अपने स्थान पर वापस जाने और अगले वर्ष पुनः आने का आग्रह करते हैं।

अखंड ज्योति का महत्व

नवरात्रि के दौरान जलाई गई अखंड ज्योति को तुरंत बुझाना नहीं चाहिए। इसे स्वाभाविक रूप से बुझने देना ही शुभ माना जाता है। जब दीपक स्वयं बुझ जाए, तब उसमें बचा हुआ घी या तेल दैनिक पूजा में उपयोग किया जा सकता है। यह धार्मिक दृष्टि से शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

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कलश विसर्जन का धार्मिक महत्व

कलश विसर्जन नवरात्रि पूजा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। इसे विधि-विधान और सही मुहूर्त में करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल एक परंपरा नहीं बल्कि आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

Written By: Kalpana Pandey

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