Swami Avimukteshwaranand: चार दिशाएं, चार मठ और चार शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अलावा कौन हैं देश के तीन अन्य शंकराचार्य?

Swami Avimukteshwaranand: प्रयागराज माघ मेले के दौरान ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिष्यों और मेला प्रशासन के बीच हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर देश में मौजूद चार शंकराचार्यों और उनके मठों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

शंकराचार्य पद का इतिहास आठवीं सदी के महान दार्शनिक आदि शंकराचार्य से जुड़ा है। उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा और अद्वैत वेदांत के प्रचार के लिए भारत की चारों दिशाओं में चार प्रमुख मठों की स्थापना की थी।


ये हैं भारत के चार शंकराचार्य और उनके मठ

ज्योतिर्मठ (उत्तर भारत – बद्रीनाथ, उत्तराखंड)

  • वर्तमान शंकराचार्य: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

  • यह मठ उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है

  • हालिया विवाद के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में


श्रृंगेरी शारदा पीठ (दक्षिण भारत – कर्नाटक)

  • वर्तमान शंकराचार्य: स्वामी भारती तीर्थ महा स्वामी

  • यह सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मठों में से एक माना जाता है

  • दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करता है


द्वारका शारदा पीठ (पश्चिम भारत – गुजरात)

  • वर्तमान शंकराचार्य: स्वामी सदानंद सरस्वती

  • यह मठ भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका में स्थित है

  • पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करता है


गोवर्धन पीठ (पूर्व भारत – पुरी, ओडिशा)

  • वर्तमान शंकराचार्य: स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

  • यह मठ जगन्नाथ पुरी से जुड़ा है

  • पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है


क्या है शंकराचार्य पद का महत्व?

  • शंकराचार्य सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक मार्गदर्शक माने जाते हैं

  • वेद, उपनिषद और अद्वैत वेदांत के प्रचारक

  • धार्मिक, सामाजिक और कई बार राष्ट्रीय मुद्दों पर भी उनकी राय प्रभावशाली मानी जाती है

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