HANUMAN-JAYANTI-हनुमान जन्मोत्सव की धूम, भव्य श्रृंगार व अखंड रामायण पाठ से भक्तिमय हुआ माहौल

HANUMAN-JAYANTI-हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर गुरूवार को नगर के संकट मोचन मंदिर में श्रद्धा, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही मंदिर परिसर ‘जय श्री राम’ और ‘जय हनुमान’ के जयकारों से गुंजायमान रहा।

हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर संकट मोचन मंदिर में प्रभु हनुमान का भव्य और मनोहारी श्रृंगार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। अल सुबह से ही दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गईं और पूरे दिन मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह बना रहा।

उत्सव की शुरुआत विशेष पूजन-अर्चन से हुई, जिसमें विद्वान ब्राह्मणों द्वारा पंचोपचार विधि गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य के साथ षोडशोपचार पूजन संपन्न कराया गया। इसके साथ ही मंदिर में अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया गया, जिसके मधुर और भक्तिमय स्वर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भरते रहे।

दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के बीच फल (केला, सेब आदि) और विशेष प्रसाद का वितरण किया गया। दोपहर से मंदिर प्रांगण में विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। रात्रि में मंदिर को रंग-बिरंगी झालरों और पुष्प सज्जा से भव्य रूप दिया गया, जो आकर्षण का केंद्र बना रहा।

इस आयोजन को सफल बनाने में पं. विभव उपाध्याय, पं. अंकित तिवारी, अर्पित और अनुभव उपाध्याय का विशेष योगदान रहा। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

धार्मिक महत्व

संकट मोचन मंदिर के महंत योगेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमानजी का जन्म हुआ था, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव राम नवमी के सात दिन बाद आती है। उन्होंने कहा कि हनुमानजी शक्ति, भक्ति और सेवा के प्रतीक हैं। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना करने से सभी संकटों का नाश होता है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार, हनुमानजी का जन्म चैत्र शुक्ल पूर्णिमा को हुआ था। इस दिन व्रत रखने और सुंदरकांड का पाठ करने से शनि दोष एवं मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। अमृत काल और अभिजीत मुहूर्त में की गई पूजा को विशेष फलदायी माना गया।

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