Nagpur Municipal Corporation election : नागपुर में शिंदे के ‘सिपाही’ बिगाड़ रहे बीजेपी का सियासी गणित, पवार के दम पर कांग्रेस भी उलझन में

Nagpur Municipal Corporation election : महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर दिलचस्प मोड़ आ गया है। नागपुर महानगर पालिका परिषद के लिए 15 जनवरी को होने वाले चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गृह क्षेत्र होने के कारण नागपुर को भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार हालात पहले जैसे नहीं दिख रहे हैं।

बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना के वे ‘सिपाही’, जो पार्टी टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतर गए हैं। ये उम्मीदवार सीधे तौर पर बीजेपी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने का काम कर रहे हैं, जिससे भगवा खेमे की रणनीति गड़बड़ाती नजर आ रही है।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, नागपुर के कई वार्डों में शिवसेना (शिंदे गुट) के बागी उम्मीदवार बीजेपी उम्मीदवारों के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। गठबंधन की राजनीति के बावजूद जमीनी स्तर पर समन्वय की कमी बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है।

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। पार्टी को उम्मीद थी कि शरद पवार की ताकत और समर्थन से उसे चुनाव में मजबूती मिलेगी, लेकिन अंदरूनी खींचतान और रणनीतिक असमंजस ने कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी है। कई सीटों पर उम्मीदवार चयन को लेकर पार्टी में असंतोष खुलकर सामने आ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नागपुर महानगर पालिका चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है। अगर वोटों का बंटवारा इसी तरह होता रहा, तो बीजेपी और कांग्रेस दोनों को अपेक्षा से कमजोर प्रदर्शन करना पड़ सकता है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि 15 जनवरी को होने वाले मतदान में नागपुर की जनता किसे अपना समर्थन देती है और क्या बीजेपी अपने गढ़ को बचा पाती है या फिर सियासी समीकरण पूरी तरह बदल जाते हैं।


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