India Maldives Ferry: भारत से मालदीव को मिली 2 हाई-स्पीड फेरी की सौगात

India Maldives Ferry: भारत ने हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (एचआईसीडीपी) के तहत मालदीव को दो और हाई स्पीड फेरी की सौगात दी है, जो दोनों देशों के बीच सहयोग में एक अहम कदम है। फेरी सेवा मालदीव के द्वीपों के बीच परिवहन में क्रांतिकारी सुधार ला रही है। यह नेटवर्क न केवल निवासियों के लिए आवाजाही को आसान बना रहा है, बल्कि आर्थिक और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहा है।

मालदीव स्थित भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा भारत के ‘हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट’ के तहत, 10 करोड़ मालदीवियन रुपये की अनुदान सहायता से मालदीव के पर्यटन एवं पर्यावरण मंत्री थोरिक इब्राहिम ने 2 अतिरिक्त हाई-स्पीड आरटीएल फेरियों का उद्घाटन किया। यह 12 फेरियों और एक टर्मिनल की एक व्यापक परियोजना का हिस्सा है, जो भारत-मालदीव के मज़बूत सहयोग को दर्शाता है।

इस पर मालदीव गणराज्य ने भारत सरकार का आभार व्यक्त किया। मालदीव के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर लिखा एल. अटोल में आरटीएल फेरी सेवाओं का उद्घाटन हुआ। मालदीव में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए सरकार के प्रयासों में एक और मील का पत्थर है। अब तक, जनवरी 2025 में हस्ताक्षरित एचआईसीडीपी चरण, एमओयू के तहत भारत के सहयोग से 12 में से 4 फेरियां डिलीवर की जा चुकी हैं।

भारत ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत मालदीव के साथ राज्जे ट्रांसपोर्ट लिंक (आरटीएल) परियोजना के अंतर्गत हाई-स्पीड फेरी सेवाएं शुरू की हैं। इसका उद्देश्य मालदीव के विभिन्न द्वीपों (एटोल्स) के बीच कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करना और स्थानीय मोबिलिटी व आजीविका को बेहतर बनाना है। इस प्रकार के सहयोग के साथ भारत हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में एक विश्वसनीय विकास भागीदार के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत कर रहा है।

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इससे पहले भारत और मालदीव के बीच सितंबर 2020 में सीधी कार्गो फेरी (पोत) सेवा शुरू की गई थी। यह कार्गो सेवा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर भारत और मालदीव के बीच घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने के लिए थी। भारत की ओर से दोनों देशों के बीच परिवहन को मजबूती देने के साथ ही मालदीव में एक से दूसरे द्वीप तक जाने के लिए शुरू की गई फेरी सर्विस भारत के समुद्री पड़ोसी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यही नहीं, भारत मालदीव को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण और समुद्री सुरक्षा (जैसे- संयुक्त गश्त) में भी सहायता प्रदान करता रहा है।

(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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