नई दिल्ली। विदेशों में कामगारों की सुरक्षा को लेकर मुस्तैद भारतीय मिशन
नई दिल्ली। भारत सरकार ने विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों के हितों की रक्षा करने और उनकी शिकायतों के निवारण के लिए प्रमुख गंतव्य देशों (जीसीसी देशों सहित) के साथ कई द्विपक्षीय और बहुपक्षीय तंत्र स्थापित किए हैं। भारतीय श्रमिकों की सुरक्षित और कानूनी आवाजाही को आसान बनाने के लिए केंद्र सरकार ने कई देशों के साथ ‘प्रवासन और आवाजाही साझेदारी समझौते’ भी किए हैं। यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 12 मार्च को राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी।

दरअसल, तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद मोहम्मद नदीमुल हक ने विदेशों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय से सवाल किया था। इसके जवाब में मंत्री ने कुछ आंकड़े पेश किए, जिससे स्पष्ट होता है कि वेतन न मिलने, अनुबंध में बदलाव या पासपोर्ट जब्त किए जाने जैसी शिकायतों पर, कानूनी जटिलताओं के बावजूद भारतीय मिशन और विदेश मंत्रालय का ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर रहा है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में कंबोडिया से इस प्रकार की 640 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनका समय रहते निपटारा कर दिया गया। वर्ष 2024 में भी वहां से आई सभी 454 शिकायतों का समाधान हुआ था। इसी तरह मालदीव, उज्बेकिस्तान, श्रीलंका, किर्गिस्तान, सिंगापुर, ट्यूनीशिया, सेशेल्स, जॉर्डन, सर्बिया और रूस जैसे देशों में भी शिकायतों के निपटान की दर काफी संतोषजनक रही।
मंत्री ने यह भी बताया कि जिन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार कार्यरत हैं, वहां भी अधिकांश मामलों में समस्याओं का समाधान किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विवाद लंबित रहता है, तो उसके समाधान के लिए स्थापित प्रक्रियाएं मौजूद हैं और भारतीय मिशन अपने नागरिकों की भलाई के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं।
Also Read: Kitchen Tips: गैस सिलेंडर के बिना खाना बनाने के ये हैं आसान विकल्प
इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फ्रांस, इटली, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के साथ ‘प्रवासन और आवाजाही साझेदारी समझौते’ किए गए हैं। वहीं इजरायल, जापान, मलेशिया, मॉरीशस, पुर्तगाल और ताइवान के साथ ‘श्रम आवाजाही समझौते’ पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
(रिपोर्ट: शाश्वत तिवारी)



