Kangana Ranaut Statement: ‘संघी बनना चाहती हूं’ वाले बयान पर घमासान, कांग्रेस ने साधा निशाना, BJP ने किया बचाव
कंगना रनौत के बयान पर कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनेत ने तीखा हमला बोला, जबकि बीजेपी नेता अमित मालवीय ने इसे वैचारिक जागृति का प्रतीक बताया।
Kangana Ranaut Statement: हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के एक बयान ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने हाल ही में कहा कि वह “संघी बनना चाहती हैं” और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विचारधारा को अपनाना चाहती हैं। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।
कंगना रनौत ने आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा कि अक्सर उनसे पूछा जाता है कि वह कब से “संघी” हो गईं। इस पर उन्होंने कहा कि वह संघ और बीजेपी की विचारधारा को अपनाना चाहती हैं क्योंकि उनके अनुसार यह एक जागरूक हिंदू की सोच है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति अपनी विचारधारा बदलना चाहता है तो उसे ऐसा करने से क्यों रोका जाए।
कंगना ने यह भी कहा कि उनके पुराने जीवन और निजी फैसलों को बार-बार निशाना बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि वह अपने अतीत का बचाव नहीं करना चाहतीं, लेकिन उन्होंने हमेशा समान वेतन, भाई-भतीजावाद और फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई है। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति को उसके पुराने जीवन के आधार पर हमेशा नहीं आंका जाना चाहिए।
कंगना के इस बयान पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि अगर कंगना “मॉडरेट हिंदू” से “संघी हिंदू” बनना चाहती हैं तो उन्हें पहले यह जान लेना चाहिए कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में महिलाओं की सदस्यता नहीं होती। उन्होंने कंगना पर भाजपा की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कई तीखे राजनीतिक हमले भी किए।
वहीं भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कंगना का बचाव करते हुए उनके बयान को समाज में हो रहे वैचारिक बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा कि कंगना का बयान केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं, बल्कि भारतीय समाज में अपनी सांस्कृतिक पहचान और सभ्यतागत मूल्यों के प्रति बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। उनके अनुसार आने वाले समय में भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं पर और अधिक गर्व करेगा।
कंगना रनौत पहले भी अपने राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर चर्चा में रही हैं। सांसद बनने के बाद भी वह राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखती रही हैं। ऐसे में उनका यह नया बयान भी राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गया है।
हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच यह स्पष्ट है कि बयान को लेकर राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी व्याख्या है। कांग्रेस इसे वैचारिक और राजनीतिक मुद्दा बनाकर भाजपा पर हमला बोल रही है, जबकि भाजपा इसे व्यक्तिगत विचार और वैचारिक स्वतंत्रता का हिस्सा बता रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बयान केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर इस पर और भी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।



