State News: कर्ज के सहारे जिंदगी की उड़ान, लेकिन बीच रास्ते खत्म हो गई सांसें – रांची एयर एम्बुलेंस क्रैश की अंदरूनी कहानी
रांची से दिल्ली जा रही एयर एम्बुलेंस क्रैश में 7 की मौत, कर्ज से इलाज और यात्रा की उम्मीदें भी उजड़ गईं
Jharkhand : चतरा जिले के सिमरिया जंगल में हुआ एयर एम्बुलेंस हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की टूटी उम्मीदों की कहानी है जो पहले से ही कर्ज और संघर्ष में डूबे हुए थे। रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली यह एयर एम्बुलेंस कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई और इसमें सवार सातों लोगों की जान चली गई।
इस हादसे के केंद्र में थे 41 वर्षीय संजय कुमार, जो लातेहार जिले के चंदवा इलाके में एक छोटा रेस्टोरेंट चलाते थे। कुछ दिन पहले उनके होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से झुलस गए। रांची में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने बेहतर उपचार के लिए दिल्ली रेफर कर दिया। परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी पैसों का इंतजाम।
पहले ही इलाज में लाखों रुपये खर्च हो चुके थे। घर की बचत खत्म हो चुकी थी। ऐसे में रिश्तेदारों और जानकारों से उधार लेकर करीब 8 लाख रुपये जुटाए गए। इसी रकम से एयर एम्बुलेंस बुक की गई, ताकि संजय को समय रहते दिल्ली पहुंचाया जा सके। परिवार को भरोसा था कि यह उड़ान उनके अपने को नई जिंदगी देगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान का संपर्क टूट गया और वह सिमरिया के घने जंगलों में गिर गया। हादसा इतना भीषण था कि किसी को बचाया नहीं जा सका। इस दुर्घटना में संजय के साथ उनकी पत्नी, एक किशोर रिश्तेदार और मेडिकल टीम के सदस्य भी शामिल थे। एक ही परिवार के कई सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया।
Jharkhand News-जीएसटी परिषद की बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री हुए शामिल
दर्द की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। विमान में सवार डॉक्टर और क्रू मेंबर्स के परिवार भी साधारण पृष्ठभूमि से थे। किसी ने पढ़ाई के लिए कर्ज लिया था, तो किसी ने परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए संघर्ष किया था। इस एक हादसे ने कई घरों की आर्थिक और भावनात्मक नींव हिला दी।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक खराब मौसम को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि आधिकारिक जांच जारी है। विमानन विभाग और संबंधित एजेंसियां तकनीकी कारणों की जांच कर रही हैं।
यह हादसा एक बड़ा सवाल भी छोड़ गया है—गंभीर मरीजों के लिए एयर एम्बुलेंस जैसी सेवाएं इतनी महंगी क्यों हैं कि आम परिवारों को कर्ज लेना पड़ता है? क्या आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की जरूरत नहीं है?
रांची एयर एम्बुलेंस क्रैश ने यह साफ कर दिया कि कभी-कभी जिंदगी बचाने की कोशिश में उठाया गया हर कदम भी किस्मत के आगे छोटा पड़ जाता है। पीछे रह जाते हैं सिर्फ अधूरे सपने, कर्ज का बोझ और यादें।
Written By: Anushri Yadav



