Political News: 16 मार्च 2026 राज्यसभा चुनाव: 10 राज्यों की 37 सीटों पर सियासी संग्राम, बदल सकता है सत्ता संतुलन

आरजेडी, शिवसेना (UBT) और एनसीपी के सामने सीट बचाने की चुनौती, भाजपा-कांग्रेस को बढ़त के आसार; गठबंधन और सीट-शेयरिंग बने निर्णायक फैक्टर

Political News:  16 मार्च 2026 को देश के 10 राज्यों में 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इस बार सियासी समीकरण बेहद पेचीदा दिखाई दे रहे हैं। चुनाव के इस दौर में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के बीच संतुलन बदल सकता है, जिससे राज्यसभा की शक्ति संरचना पर बड़ा असर पड़ सकता है।

विशेष रूप से विपक्षी गठबंधन के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हैं। लालू यादव की आरजेडी, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और शरद पवार की एनसीपी जैसी पार्टियों को इस बार सीटें सुरक्षित करने में कठिनाई हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस को माना जा रहा है कि वे इस बार के चुनाव से फायदा उठा सकते हैं, जबकि विपक्षी दलों में मतों का बंटवारा और सहयोगियों का समर्थन न मिलने की संभावना चर्चा में है।

आरजेडी और बिहार का परिदृश्य

आरजेडी के लिए बिहार में स्थिति खासकर चिंता का विषय है। पार्टी के कई सीनियर नेताओं के अनुसार, इस चुनाव में आरजेडी की आधी ताकत ही सक्रिय दिखाई दे रही है। कुछ सीटें जिन पर आरजेडी को भरोसा था, वहां सहयोगियों और स्थानीय समीकरणों के चलते असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सीनियर नेताओं का मानना है कि यदि सहयोगी दलों का समर्थन नहीं मिला, तो आरजेडी को राज्यसभा में अपनी पकड़ मजबूत करने में कठिनाई होगी।

लेफ्ट और उद्धव‑पवार गठबंधन

बिहार और महाराष्ट्र की राजनीति में लेफ्ट और उद्धव‑पवार के गठबंधन की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। शिवसेना (UBT) और एनसीपी को कई राज्यों में सीटें मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वर्तमान मत गणना और सहयोगियों की स्थिति इस संभावना को कमजोर कर रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस चुनाव में विपक्षी दलों की सीटों में कटौती से संपूर्ण राज्यसभा में सत्ता संतुलन बदल सकता है।

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सीट‑शेयरिंग और गठबंधन की उलझी दुविधा

राज्यसभा चुनाव में सहयोगियों के बीच सीट‑शेयरिंग का मसला हमेशा विवाद का विषय रहा है। इस बार भी कई दलों के बीच मतों का वितरण और समर्थन लेकर अनबन की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि विपक्ष अपने वोट बैंक और सहयोगियों के बीच संतुलन नहीं बना पाया, तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है। भाजपा और कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपेक्षाकृत आसान नजर आ रहा है, क्योंकि उनका वोट बैंक स्थिर है और वे गठबंधन से अपेक्षाकृत अधिक सीटें सुरक्षित कर सकते हैं।

राज्यसभा में प्रभाव

37 सीटों के इस चुनाव का परिणाम सीधे राज्यसभा में सत्ता संतुलन को प्रभावित करेगा। विपक्ष के लिए यह चिंता का विषय है कि यदि सीटें कम मिलीं, तो उन्हें संसद में प्रभावी भूमिका निभाने में कठिनाई होगी। इसके विपरीत, यदि भाजपा और कांग्रेस अपने लक्ष्य में सफल रहे, तो राज्यसभा में उनके पास मजबूत स्थिति बनेगी, जिससे कानून निर्माण और संसदीय प्रक्रिया में उनका दबदबा बढ़ सकता है।

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राजनीतिक रणनीति और आगे की चुनौती

चुनाव से पहले सभी दल अपनी रणनीति में तेज हलचल दिखा रहे हैं। विपक्षी दल यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं कि उनकी सीटें सुरक्षित रहें और सहयोगियों का समर्थन पूर्ण रूप से हासिल हो। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में छोटे दलों की भूमिका भी निर्णायक होगी, क्योंकि उनकी संख्या बड़े गठबंधन की जीत या हार को तय कर सकती है।

राज्यसभा चुनाव 2026 न केवल देश की राजनीतिक दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी संकेत देगा कि विपक्षी दल गठबंधन और सीट‑शेयरिंग की जटिलताओं को कितनी कुशलता से संभालते हैं। इस चुनाव के परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि 37 सीटों के इस मुकाबले में किस गठबंधन की पकड़ मजबूत रही।

Written By: Anushri Yadav

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