Narendra Modi Israel Visit: क्या लेफ्ट भूल गया ज्योति बाबू की इजरायल यात्रा? PM मोदी के दौरे को बता रहा ‘शर्म की बात’

Narendra Modi Israel Visit:  भारत में इजरायल को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। वाम दल जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे को ‘शर्म की बात’ बता रहे हैं, वहीं राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या लेफ्ट खुद अपने अतीत को भूल गया है?

दरअसल, साल 2000 में पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने इजरायल की आधिकारिक यात्रा की थी। उस समय यह दौरा काफी चर्चा में रहा था, क्योंकि वामपंथी दल पारंपरिक रूप से फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल की नीतियों के विरोध के लिए जाने जाते रहे हैं।

ज्योति बसु का इजरायल दौरा क्यों था अहम?

ज्योति बसु की यात्रा का मुख्य उद्देश्य कृषि, सिंचाई और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना था। इजरायल जल प्रबंधन और आधुनिक खेती तकनीकों में अग्रणी माना जाता है। पश्चिम बंगाल में कृषि सुधार और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं को लेकर यह दौरा किया गया था।

मोदी का इजरायल दौरा और विवाद

2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल की यात्रा पर गए थे। यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला स्वतंत्र इजरायल दौरा था। इस दौरान रक्षा, कृषि, साइबर सुरक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में कई समझौते हुए।

हालांकि, वाम दलों और कुछ विपक्षी नेताओं ने इस दौरे की आलोचना करते हुए कहा कि भारत को फिलिस्तीन के समर्थन की अपनी ऐतिहासिक नीति से विचलित नहीं होना चाहिए।

दोहरे मानदंड का आरोप?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में व्यावहारिकता और रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में जब ज्योति बसु ने राज्य के हित में इजरायल का दौरा किया था, तो आज उसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री के दौरे का विरोध राजनीतिक दोहरे मानदंड की तरह देखा जा रहा है।

हालांकि वाम दलों का तर्क है कि केंद्र सरकार की विदेश नीति का व्यापक प्रभाव होता है, जबकि किसी राज्य के मुख्यमंत्री की यात्रा का दायरा सीमित होता है।

निष्कर्ष

इजरायल को लेकर भारत की नीति समय के साथ विकसित हुई है। एक ओर फिलिस्तीन के प्रति समर्थन, तो दूसरी ओर इजरायल के साथ रणनीतिक साझेदारी—दोनों के बीच संतुलन साधना भारत की विदेश नीति की पहचान रही है।

अब सवाल यही है कि क्या यह विवाद महज राजनीतिक बयानबाजी है या फिर विदेश नीति पर एक गंभीर वैचारिक मतभेद?

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