Prayagraj News-स्मार्ट मीटर या परेशानी का पिटारा? बिना सूचना प्रीपेड में बदले मीटर, उपभोक्ताओं की बढ़ी मुश्किलें

Prayagraj News-बिजली चोरी पर लगाम लगाने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा शुरू की गई स्मार्ट मीटर योजना अब आम उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। जिले में तेजी से लगाए गये यह स्मार्ट मीटरएक समय अवधि के बाद प्रीपेड मोड में बदल जा रहे है, जिससे लोगों को अचानक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। बिजली विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग द्वारा पूरे जिले के अधिकतर घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य लगभग पूरा किया जा चुका है।

विभाग का दावा है कि इससे बिलिंग प्रणाली पारदर्शी होगी और बिजली चोरी पर रोक लगेगी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके मीटर कब पोस्टपेड से प्रीपेड में बदल गए, इसकी उन्हें कोई जानकारी ही नहीं दी गई। बिजली का बिल जमा करने वालों की लाइन लगी थी। जहां पर अपना बिल जमा करने के लिए सुभाष, सुशीला और नैना भी खड़े थे। उन्होंने बताया कि उनका मीटर पोस्टपेड से प्रीपेड होगया है।

उन्हें इसकी जानकारी तब, जब अचानक उनके घर की बिजली कट गई। जांच करने पर मालूम होता है कि उनके मीटर का बैलेंस शून्य से नीचे यानी माइनस में चला गया है। ऐसे में बिना किसी पूर्व चेतावनी के बिजली आपूर्ति बंद कर दी जाती है, जिससे आम जीवन प्रभावित हो रहा है। इस पर चीफ इंजीनियर राजेश कुमार से पूछा गया कि क्या कोई सीमा है? मीटर में कितना बैलेंस माइनस होने पर बिजली कट जाएगी। इस पर उन्होंने बताया कि अभी इसका निर्धारण नीं किया गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि बिजली विभाग खुद यह स्पष्ट नहीं कर पा रहा है कि मीटर का बैलेंस कितने माइनस में जाने पर बिजली काटी जाएगी। इस संबंध में जब विभाग के अधिकारियों से बातचीत की गई, तो उनका कहना था कि अभी इस संबंध में कोई तय मानक निर्धारित नहीं किया गया है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जल्द ही इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, लेकिन तब तक उपभोक्ताओं को असुविधा झेलनी पड़ सकती है। उपभोक्ताओं का यह भी कहना है कि प्रीपेड सिस्टम में उन्हें बार-बार रिचार्ज करना पड़ता है, और अगर समय पर रिचार्ज न हो पाए तो बिजली तुरंत काट दी जाती है। इससे खासकर बुजुर्गों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को ज्यादा परेशानी हो रही है, जहां डिजिटल भुगतान और तकनीकी जानकारी सीमित है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर में खपत का आंकड़ा पहले की तुलना में अधिक दिख रहा है, जिससे उनका खर्च बढ़ गया है। हालांकि विभाग इन आरोपों से इनकार कर रहा है और कह रहा है कि स्मार्ट मीटर पूरी तरह सटीक हैं। फिलहाल, स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य भले ही सराहनीय हो, लेकिन इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी उपभोक्ताओं के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। यदि समय रहते विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह योजना लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का पिटारा बन सकती है।

रिपोर्ट: आकाश त्रिपाठी प्रयागराज

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