International News: मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: क्या ईरान–अमेरिका टकराव की ओर बढ़ रहे हैं हालात? कई देशों ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा

International News:  मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिखाई दे रहा है। जिनेवा में हुए तीसरे दौर की वार्ता से भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, जिसके बाद क्षेत्र में संभावित सैन्य टकराव की आशंका गहरा गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने अपनी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं और राष्ट्रपति स्तर पर सख्त संदेश दिए गए हैं कि यदि कूटनीति विफल रहती है तो अन्य विकल्प खुले हैं।

जिनेवा वार्ता बेनतीजा, अनिश्चितता बढ़ी

ईरान के परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर चल रही बातचीत का तीसरा चरण भी बिना किसी समझौते के खत्म हुआ। सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्ष कुछ बिंदुओं पर सहमति के करीब थे, लेकिन प्रमुख मुद्दों पर मतभेद बने रहे। वार्ता की विफलता ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

किन देशों ने जारी की एडवाइजरी?

तनाव को देखते हुए कई देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने या अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • अमेरिका: गैर-जरूरी दूतावास स्टाफ और परिवारों की वापसी की प्रक्रिया शुरू।

  • यूनाइटेड किंगडम (UK): दूतावास कर्मियों की आंशिक वापसी और ट्रैवल एडवाइजरी अपडेट।

  • इटली और पोलैंड: नागरिकों को तत्काल ईरान छोड़ने की सलाह।

  • चीन: सुरक्षा जोखिम का हवाला देते हुए नागरिकों को जल्द निकलने का संदेश।

  • कनाडा, जर्मनी, सिंगापुर, साइप्रस समेत कई अन्य देशों ने भी सतर्कता एडवाइजरी जारी की।

  • भारत: भारतीय दूतावास ने नागरिकों से सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और आवश्यक होने पर वापसी की तैयारी रखने को कहा है।

International News: श्रीलंकाई नौसेना को प्रशिक्षण देने के लिए त्रिंकोमाली पहुंचा ‘आईएनएस तरंगिनी

सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाई है। समुद्री और हवाई निगरानी गतिविधियों में इजाफा हुआ है। हालांकि, अभी तक किसी औपचारिक सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दबाव की रणनीति भी हो सकती है ताकि वार्ता की मेज पर बेहतर शर्तें हासिल की जा सकें।

क्या सच में युद्ध की आशंका?

विश्लेषकों का कहना है कि पूर्ण युद्ध की संभावना को नकारा नहीं जा सकता, लेकिन कूटनीतिक रास्ते अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। क्षेत्रीय स्थिरता, तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। इसी वजह से कई देश पहले से एहतियाती कदम उठा रहे हैं।

आगे क्या?

फिलहाल दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। यदि बातचीत का नया दौर शुरू होता है तो तनाव कम हो सकता है, लेकिन अगर बयानबाजी और सैन्य तैयारी जारी रही तो स्थिति और जटिल हो सकती है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले कुछ दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।

Written By: Anushri Yadav

Related Articles

Back to top button