Maharashtra CM Statement: मुंबई को 2–3 साल में ‘ट्रैफिक-फ्री’ बनाने का दावा, दिल्ली से तुलना पर फडणवीस के बयान ने छेड़ी बहस

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा मुंबई और दिल्ली के ट्रैफिक को लेकर की गई तुलना के बाद राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। सीएम फडणवीस ने कहा है कि राज्य सरकार का लक्ष्य आने वाले 2 से 3 वर्षों में मुंबई को लगभग ‘ट्रैफिक-फ्री’ शहर बनाना है। इसके लिए बड़े पैमाने पर आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक मुंबई में ट्रैफिक की समस्या स्थायी समाधान की मांग कर रही थी, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार भूमिगत मार्ग (अंडरग्राउंड टनल), नई चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर और विस्तृत मेट्रो नेटवर्क पर तेजी से काम कर रही है।

क्या है फडणवीस का मुख्य दावा

देवेंद्र फडणवीस ने अपने बयान में कहा कि मुंबई में ट्रैफिक जाम को जड़ से खत्म करने के लिए केवल अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि लॉन्ग टर्म प्लानिंग की जा रही है। उनका दावा है कि:

  • अंडरग्राउंड टनल और कोस्टल रोड से ट्रैफिक डायवर्ट होगा

  • मेट्रो नेटवर्क के पूरा होने से निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी

  • नई सड़कों और जंक्शन सुधार से यात्रा समय में भारी कमी आएगी

उन्होंने संकेत दिया कि दिल्ली की तुलना में मुंबई की भौगोलिक संरचना अलग है, इसलिए यहां मल्टी-लेयर ट्रैफिक सिस्टम पर फोकस किया जा रहा है।

दिल्ली–मुंबई तुलना पर सवाल

हालांकि फडणवीस के इस बयान के बाद विपक्षी दलों और ट्रैफिक विशेषज्ञों ने सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि:

  • मुंबई में जनसंख्या घनत्व दिल्ली से कहीं अधिक है

  • सड़क विस्तार की सीमाएं हैं

  • निर्माण कार्य के चलते फिलहाल ट्रैफिक और बिगड़ रहा है

आलोचकों का मानना है कि 2–3 साल में “ट्रैफिक-फ्री” का लक्ष्य बहुत महत्वाकांक्षी है और इसे जमीनी हकीकत में उतारना बड़ी चुनौती होगी।

सरकार का पक्ष

राज्य सरकार का कहना है कि मुंबई जैसे महानगर के लिए मेट्रो, कोस्टल रोड, ट्रांस-हार्बर लिंक और अंडरग्राउंड इंफ्रास्ट्रक्चर ही भविष्य का समाधान है। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होते ही ट्रैफिक का दबाव बड़े पैमाने पर कम होगा और मुंबई की यात्रा व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव आएगा।

जनता की नजरें नतीजों पर

फिलहाल मुंबईकर रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझ रहे हैं और मुख्यमंत्री के इस दावे को लेकर लोगों की उम्मीदें भी जुड़ी हैं। अब देखना होगा कि आने वाले 2–3 वर्षों में सरकार अपने वादे को किस हद तक ज़मीन पर उतार पाती है।

Related Articles

Back to top button