उत्तर प्रदेश पूर्वांचल: नगर के प्राचीन शीतला माता मन्दिर परिसर में वैदिक मंत्रोचार के बीच 201 ब्राह्मण बटुकों का हुआ यज्ञोपवीत
उत्तर प्रदेश पूर्वांचल: ब्राह्मण विकास परिषद के संरक्षक डा• एस•सी• तिवारी, रामजी उपाध्याय, जिलाध्यक्ष ऋषिकेश पाण्डेय, जिला महामंत्री संजय तिवारी के अलावा ब्राह्मण विकास परिषद के वरिष्ठ सदस्य पंडित विजय शंकर तिवारी व राजेश जी महराज के देख रेख में काशी के आचार्य गणों नें 201ब्राह्मण बटुको का उप नयन संस्कार कराकर उन्हें दीक्षित कर संयमित जीवन जीने हेतु मार्ग दर्शन किया। इस यज्ञोपवीत कार्यक्रम में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पूर्वांचल के अन्य जनपदों से भी ब्राह्मण बुटक उपनयन संस्कार में शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नत्थूपुर से दो बार विधायक रहे उमेश चंद पाण्डेय ने कहा कि ब्राह्मण विकास परिषद का यह कार्यक्रम अति सराहनीय है जिससे कि एक साथ भारी संख्या में बटुको का उप नयन संस्कार किए जाने से समाज के अन्य वर्ग भी अपने संस्कारो के प्रति जुड़ेगा, ब्राह्मण विकास परिषद के संयोजक डॉक्टर एस• सी• तिवारी नें कहा कि सनातन धर्म में कुल 16 संस्कारो का उल्लेख किया हैं जिसमें उप नयन संस्कार एक महत्व पूर्ण संस्कार हैं।

जिसके बाद से ही एक ब्रह्मचारी कठोर एवं संयमित जीवन जीते हुए जीवन, व भविष्य में आने वाले भावी चुनौती के लिए अपने को तैयार करता हैं। उन्होंने कहा कि आज जितने भी बटुको का संस्कार हुआ हैं।वें सभी आज से अपना काम स्वयं करगे।संगठन के जिलाध्यक्ष ऋषिकेश पाण्डेय नें कहा कि शास्त्रों में द्विज वर्ण का यज्ञोपवीत होने का प्रमाण मिलता हैं। जिसमें ब्राह्मण वर्ण के लिए 08 वर्ष क्षत्रिय के लिए 11वर्ष, वैश्य के 16 वर्षकी आयु निर्धारित की गयी हैं। इस लिए प्रत्येक वर्ण का यह दायित्व बनता हैं। कि समय रहते बटुको का उप नयन हो जाय, पंडित राजेश जी महाराज ने कहा कि वैदिक युग में महिलाओं का भी उपनयन संस्कार होता था जिन्हे ब्राह्मवादिनी कहा जाता था इस संस्कार के बाद ही महिलाए वेदो का अध्ययन करती थी। कार्यक्रम के अन्त में संगठन के संयोजक राम जी उपाध्याय सम्मानित जनता का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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इस अवसर पर, पंडित प्रणव चतुर्वेदी, एडवोकेट संजीव कुमार द्विवेदी, राजेश मिश्र, बड़राव ब्लॉक प्रमुख प्रति निधि आद्याशंकर, वरिष्ठ शिक्षक अजय कुमार तिवारी,मिश्रा,सतीश कुमार पाण्डेय एडोकेट, ब्राह्मण विकास परिषद के वरिष्ठ कार्यकर्ता नरेंद्र तिवारी, प्रशांत पाण्डेय, शशांक तिवारी डॉ० अरुण कुमार मिश्र, चन्द्र प्रकाश तिवारी सहित भारी संख्या में लोग मौजूद रहे। उपनयन संस्कार के दौरान ब्राह्मण बटुको के द्वारा अपने स्वजनों से विक्षाटन कार्य किया गया।

यह भिक्षाटन उस बात का द्योतक हैं कि युवा उन परिस्थितियों के लिए भी तैयार रहे जिससे कठिन दौर में भी अपने को संयमीत रखते हुए धर्म,अर्थ, काम व मोक्ष को प्राप्त किया जा सके। मनुस्मृति में ब्राह्मण वर्ण के आजीविका के निर्धारण करने के लिए कर्मकांड व भिक्षाटन को प्रमुख माना गया हैं। इसके लिए मनुस्मृति में एक श्लोक लिखा गया है अध्ययन्मअध्यापनम,यजनम याजनम दान प्रति गृहस्य चैव ब्राह्मण नाम कल्पायतम।



