Pre Marriage Health Checkup: शादी से पहले चुपचाप क्यों करा रहे दूल्हा-दुल्हन ये टेस्ट? पुरुषों में बढ़ता बांझपन बदल रहा सोच
Pre Marriage Health Checkup: शादी से पहले कुंडली मिलान, पारिवारिक पृष्ठभूमि और पर्सनैलिटी मैचिंग तक सीमित रहने वाली भारतीय समाज की सोच अब तेजी से बदल रही है। खासतौर पर पुरुषों में बढ़ते बांझपन (Male Infertility) के मामलों ने युवाओं को शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट कराने के लिए प्रेरित किया है। कपल्स अब भविष्य में आने वाली अनचाही परेशानियों से बचने के लिए इस विषय पर खुलकर बातचीत करने लगे हैं।
पुरुषों में बांझपन के मामले क्यों बढ़ रहे हैं
चिकित्सकों के अनुसार बदलती जीवनशैली, तनाव, धूम्रपान-शराब का सेवन, मोटापा, अनियमित खान-पान, नींद की कमी और पर्यावरण प्रदूषण जैसे कारणों से पुरुषों में स्पर्म काउंट और क्वालिटी लगातार गिर रही है। इसका सीधा असर फर्टिलिटी पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले जहां संतान न होने की जिम्मेदारी अधिकतर महिलाओं पर डाली जाती थी, अब जागरूकता बढ़ने के साथ यह साफ हो रहा है कि लगभग 40–50 प्रतिशत मामलों में पुरुष कारण भी जिम्मेदार होते हैं।
शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट का बढ़ता चलन
अब कई कपल्स शादी से पहले ही सीमन एनालिसिस, हार्मोन टेस्ट और अन्य फर्टिलिटी जांच करा रहे हैं। इसका मकसद रिश्ते को तोड़ना नहीं, बल्कि संभावित समस्या को पहले समझना और समय रहते समाधान निकालना है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फर्टिलिटी टेस्ट कराने से:
-
भविष्य की प्लानिंग आसान होती है
-
समय रहते इलाज या लाइफस्टाइल सुधार संभव होता है
-
शादी के बाद तनाव और आपसी आरोप-प्रत्यारोप से बचाव होता है
सोच में बड़ा बदलाव
समाज में अब यह धारणा बन रही है कि शादी सिर्फ भावनात्मक रिश्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदार साझेदारी है। युवा जोड़े अब आगे बढ़कर संतान, स्वास्थ्य और मानसिक तैयारी जैसे मुद्दों पर भी ईमानदारी से चर्चा कर रहे हैं।
काउंसलर्स का कहना है कि फर्टिलिटी जैसे संवेदनशील विषय पर बातचीत रिश्ते में भरोसा बढ़ाती है और शादीशुदा जीवन की मजबूत नींव रखती है।
विशेषज्ञों की राय
डॉक्टरों के अनुसार शादी से पहले फर्टिलिटी टेस्ट कराना कोई डरने वाली बात नहीं, बल्कि यह एक जागरूक और परिपक्व फैसला है। समय रहते जानकारी मिलने से दंपति सही निर्णय ले सकते हैं और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सहायता भी ले सकते हैं।
खामोशी टूट रही है
जिस विषय पर पहले बात करना सामाजिक तौर पर वर्जित माना जाता था, अब वही विषय रिश्तों की पारदर्शिता का हिस्सा बनता जा रहा है। पुरुषों में बढ़ता बांझपन न सिर्फ मेडिकल बल्कि सामाजिक चेतावनी भी है, जो जीवनशैली सुधार और जागरूकता की मांग करता है।



