Viral News Today: कोरमंगला में महिला ऑटो ड्राइवर की कहानी ने जीता दिल, सोशल मीडिया पर हो रही जमकर तारीफ
Viral News Today: बेंगलुरु के कोरमंगला इलाके में महिला ऑटो रिक्शा चालकों की बढ़ती मौजूदगी अब चर्चा का विषय बन गई है। हाल ही में सोशल मीडिया यूज़र स्नेहा की एक पोस्ट ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा, जिसमें उन्होंने एक महिला ऑटो ड्राइवर के साथ अपने अनुभव को बेहद प्रेरणादायक बताया।
स्नेहा ने बताया कि एक सामान्य सी ऑटो बुकिंग उनके लिए खास बन गई, जब उनकी सवारी एक महिला ड्राइवर के साथ हुई। उन्होंने इस अनुभव को “बहुत ही प्यारा और दिल छू लेने वाला” बताया और कहा कि बेंगलुरु में ऐसे मौके बहुत कम देखने को मिलते हैं।
यात्रा के दौरान ड्राइवर ने अपनी कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने ‘नम्मा यात्री’ प्लेटफॉर्म के तहत करीब 40 दिनों की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद उन्होंने एक इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदा, जिसे लोन पर लिया गया था। अब तक वह करीब ढाई लाख रुपये चुका चुकी हैं और हर महीने लगभग 45 हजार रुपये की कमाई कर रही हैं।
ड्राइवर ने यह भी बताया कि कोरमंगला में करीब 300 महिला ऑटो ड्राइवरों का एक सपोर्ट ग्रुप है, जहां वे एक-दूसरे से जुड़ी रहती हैं और मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देती हैं। यह नेटवर्क उन्हें आत्मविश्वास और सुरक्षा का एहसास कराता है।
सुरक्षा को लेकर पूछे जाने पर ड्राइवर ने कहा कि उन्हें अब तक किसी तरह की छेड़छाड़ या बदसलूकी का सामना नहीं करना पड़ा है। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर लोग सम्मान के साथ पेश आते हैं, जिससे उनका मनोबल और भी बढ़ता है।
एक भावुक पल का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब ट्रैफिक सिग्नल पर छोटी बच्चियां उन्हें देखकर मुस्कुराती और हाथ हिलाती हैं, तो उन्हें लगता है कि वह सही दिशा में कुछ कर रही हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
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हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें इलेक्ट्रिक ऑटो खरीदने में किसी तरह की सरकारी सब्सिडी या विशेष ब्याज दर का फायदा नहीं मिला। स्नेहा ने अपनी पोस्ट में लिखा कि अगर महिलाओं को इस सेक्टर में और आगे बढ़ाना है तो संस्थागत मदद और नीतिगत समर्थन बेहद ज़रूरी है।
इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूज़र्स ने जमकर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने महिला ड्राइवर की हिम्मत, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की तारीफ की। एक यूज़र ने लिखा कि ऐसी कहानियां समाज में भरोसा लौटाती हैं, तो वहीं दूसरे ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करती है।
कोरमंगला की यह कहानी सिर्फ एक महिला की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों महिलाओं की है जो परंपरागत सोच को तोड़कर नए रास्ते बना रही हैं और आत्मनिर्भर भारत की तस्वीर को मजबूत कर रही हैं।



