Lifestyle Update: फोन लेते ही रोने लगता है बच्चा? जानिए क्यों यह बिल्कुल नॉर्मल नहीं है
एक्सपर्ट्स ने चेताया: बच्चों में मोबाइल और टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है। सही दिशा-निर्देश और सीमित स्क्रीन टाइम जरूरी
Lifestyle Update: आजकल छोटे बच्चों का मोबाइल और टैबलेट के साथ रिश्ता बढ़ता जा रहा है। घर में वीडियो देखने, गेम खेलने या कॉल लेने के लिए बच्चे फोन की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं। लेकिन कई माता-पिता यह देखकर परेशान हैं कि बच्चा फोन उठाते ही रोने लगता है या चिड़चिड़ा हो जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बिल्कुल सामान्य व्यवहार नहीं है और इसे नजरअंदाज करना बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हो सकता है।
छोटे बच्चों में मोबाइल का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। तीन-चार साल के बच्चे भी स्क्रीन के सामने सहज महसूस करते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं – मनोरंजन की आसान उपलब्धता, गेम्स और वीडियो का आकर्षण, और परिवार का मोबाइल पर समय बिताना। बच्चे जल्दी ही मोबाइल को मनोरंजन और सुरक्षा का माध्यम मानने लगते हैं।
जब बच्चा फोन उठाते ही रोने लगता है, तो इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक कारण हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लगातार स्क्रीन देखने से मस्तिष्क अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है। छोटे बच्चों में ध्यान केंद्रित करने की क्षमता सीमित होती है, और जब उनका “मोबाइल समय” छिनता है, तो वे नाराज या चिड़चिड़े हो जाते हैं। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन टाइम से बच्चे जल्दी गुस्सा करने वाले, अकेलेपन में रहने वाले या भावनात्मक रूप से अस्थिर हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक मोबाइल या टैबलेट पर स्क्रीन देखने से स्लीप डिसऑर्डर, आंखों की समस्या, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह डिप्रेशन और चिंता जैसी गंभीर मानसिक समस्याओं का कारण भी बन सकता है।
बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। माता-पिता को चाहिए कि वे मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों के लिए सीमित करें और उन्हें वैकल्पिक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें। खेल, पेंटिंग, किताबें पढ़ना या बाहरी गतिविधियों में शामिल करना बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए फायदेमंद होता है। इसके साथ ही लगातार स्क्रीन पर रहने के बाद नियमित ब्रेक देना भी जरूरी है।
अगर आपका बच्चा फोन लेते ही रोने लगता है, तो इसे हल्के में न लें। यह संकेत है कि बच्चे का मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। सही दिशा-निर्देश, सीमित स्क्रीन टाइम और वैकल्पिक गतिविधियों से बच्चे को सुरक्षित, स्वस्थ और खुशहाल बचपन दिया जा सकता है। माता-पिता का ध्यान और सही मार्गदर्शन ही बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रख सकता है।
Written By: Anushri Yadav



