Army Day 2026 : आरट्रैक में 78वां सेना दिवस समारोह आयोजित, राज्यपाल बोले– भारतीय सेना बलिदान, साहस और संकल्प की प्रतीक
Army Day 2026 : शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड में 78वां सेना दिवस समारोह आयोजित। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भारतीय सेना को बलिदान, साहस और संकल्प का प्रतीक बताया।
Army Day 2026 : आर्मी ट्रेनिंग कमांड (ARTRAC), शिमला में 78वें सेना दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। राज्यपाल ने भारतीय सेना को अद्वितीय बलिदान, अदम्य साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक बताया।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि मौजूदा समय में सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं। साइबर युद्ध, सूचना युद्ध और नई तकनीकी चुनौतियों के बीच आर्मी ट्रेनिंग कमांड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि आरट्रैक द्वारा दिया जा रहा नेतृत्व और प्रशिक्षण भारतीय सेना को न केवल सामरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी सुसज्जित करता है।
सेना दिवस केवल समारोह नहीं, संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक
राज्यपाल ने कहा कि सेना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए सैनिकों द्वारा दिए गए सर्वोच्च बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आरट्रैक भारतीय सेना की प्रशिक्षण और सिद्धांतगत उत्कृष्टता का केंद्र है, जो भविष्य के युद्धक्षेत्रों की जटिल चुनौतियों के अनुरूप सेना को तैयार कर रहा है।
हिमाचल और सेना का ऐतिहासिक रिश्ता
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश और भारतीय सेना का रिश्ता ऐतिहासिक और भावनात्मक रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के लगभग हर गांव में सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा देखने को मिलती है और यहां के वीर सपूतों ने देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिए हैं।
रक्षा बजट और आत्मनिर्भर भारत पर जोर
राज्यपाल ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रक्षा मंत्रालय को लगभग 6.81 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9.5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने इसे बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
उन्होंने अग्निवीर योजना की सराहना करते हुए कहा कि इससे सेना में युवा ऊर्जा का समावेश हुआ है। योजना के लिए बजट बढ़ाकर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक किया गया है। इसके साथ ही वन रैंक वन पेंशन और ईसीएचएस योजना के माध्यम से पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की प्रभावी भूमिका ने भारत की सैन्य क्षमता को साबित किया है। उन्होंने बताया कि उभरती परिचालन जरूरतों को देखते हुए लगभग 50,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त रक्षा आवंटन पर भी विचार किया जा रहा है।
सैनिकों के परिवारों को नमन
राज्यपाल ने सैनिकों के परिवारों के त्याग और धैर्य को नमन करते हुए कहा कि उनका मौन बलिदान राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। उन्होंने सभी वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इससे पूर्व आर्मी ट्रेनिंग कमांड के जीओसी-इन-चीफ जनरल देवेन्द्र शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय सेना हर चुनौती का तेज और संतुलित जवाब देने में सक्षम है। कार्यक्रम के अंत में लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. दहिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री कर्नल (डॉ.) धनीराम शांडिल, सांसद सुरेश कश्यप, शिमला नगर निगम महापौर सुरेन्द्र चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता सहित अनेक गणमान्य नागरिक, सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।



