‘सहमति-असहमति ही लोकतंत्र की ताकत’, 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला
लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला बोले—सहमति और असहमति लोकतंत्र की असली शक्ति हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान भवन में सोमवार से तीन दिवसीय 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) शुरू हो गया। 19 से 21 जनवरी तक चलने वाले इस सम्मेलन का उद्घाटन राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया। उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सहमति और असहमति लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति हैं और इन्हीं से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूती मिलती है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम से लेकर देश की राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। विधायिका जनता की समस्याओं के समाधान और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने का सबसे सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि संवाद और विमर्श के जरिए भारत ने यह सिद्ध किया है कि संसदीय लोकतंत्र लोकतंत्र की सर्वोत्तम परंपरा है।
2047 के विकसित भारत लक्ष्य पर जोर
ओम बिरला ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प के साथ देश निरंतर आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी लोकतांत्रिक संस्थाओं की सशक्त भूमिका आवश्यक है। उन्होंने पीठासीन अधिकारियों से निष्पक्षता बनाए रखने और सदन की कार्यवाही को अधिक से अधिक चलाने पर जोर दिया, ताकि सार्थक और गुणवत्तापूर्ण चर्चा संभव हो सके।
यूपी विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का संबोधन
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सम्मेलन की मेजबानी मिलने को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नौ वर्ष के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि इससे प्रदेश की छवि और आकर्षण दोनों बढ़े हैं। महाना ने कहा कि आज विधानसभा में विभिन्न पृष्ठभूमि से आए लोग विधायक बनकर लोकतंत्र को नई दिशा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के लिए शुभकामनाएं भेजीं, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने पढ़कर सुनाया। पीएम मोदी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस और चर्चा पारदर्शिता, निष्पक्षता और सम्मान के साथ आगे बढ़नी चाहिए। पीठासीन अधिकारी सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के संरक्षक होते हैं।
लोकतंत्र की आत्मा के संरक्षक हैं पीठासीन अधिकारी: राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह सम्मेलन भारतीय संसदीय परंपराओं की सुदृढ़ता का प्रतीक है। उन्होंने पीठासीन अधिकारियों को लोकतंत्र की आत्मा का संरक्षक बताया और कहा कि उनकी निष्पक्षता ही सदनों को जनआकांक्षाओं का प्रभावी मंच बनाती है।



