Union Budget 2026 : निर्मला सीतारमण का बजट भाषण होगा ऐतिहासिक, लॉन्ग-टर्म विज़न पर रहेगा खास फोकस
Union Budget 2026 : केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भाषण ऐतिहासिक होने वाला है। इस बार बजट के पार्ट B में लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों और भारत के वैश्विक रोडमैप पर विशेष फोकस रहेगा।
Union Budget 2026 : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार, 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 में एक नया इतिहास रचने जा रही हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस साल का बजट भाषण पिछले 75 वर्षों में पेश किए गए सभी बजट भाषणों से अलग और अनोखा होगा।
खास बात यह है कि इस बार बजट भाषण के पार्ट B पर अभूतपूर्व जोर दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, यह बजट प्रस्तुति अब तक की परंपरा से हटकर होगी। अब तक बजट भाषण का मुख्य फोकस पार्ट A पर रहता था, जिसमें सरकार की योजनाओं और सेक्टोरल घोषणाओं का विवरण दिया जाता था, जबकि पार्ट B अपेक्षाकृत संक्षिप्त रहता था। लेकिन बजट 2026 में यह समीकरण बदलता हुआ नजर आएगा।
पार्ट B में दिखेगा भारत का लॉन्ग-टर्म रोडमैप
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस बार पार्ट B में शॉर्ट-टर्म के साथ-साथ लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा कर सकती हैं। इसमें भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं, भविष्य की रणनीति और वैश्विक मंच पर देश की भूमिका को लेकर स्पष्ट रोडमैप पेश किए जाने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि बजट का यह हिस्सा भारत की स्थानीय ताकतों को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने पर केंद्रित होगा, जिसमें मौजूदा क्षमताओं के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को भी रेखांकित किया जाएगा। यही वजह है कि बजट भाषण के इस हिस्से पर देश-विदेश के अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों की खास नजर रहेगी।
लगातार नौवां बजट पेश करेंगी सीतारमण
निर्मला सीतारमण अपना लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। सुधारों, सरकारी खर्च और आर्थिक दिशा को लेकर इस बजट से काफी उम्मीदें जुड़ी हैं। खास बात यह भी है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार बजट रविवार को पेश किया जाएगा, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आ रहा बजट
केंद्रीय बजट 2026 ऐसे समय में पेश किया जा रहा है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, कमोडिटी कीमतों में अस्थिरता और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की असमान मौद्रिक नीतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि, घरेलू स्तर पर मांग मजबूत बनी हुई है और हालिया GDP ग्रोथ 6 तिमाहियों के उच्चतम स्तर 8.2% पर पहुंची है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का बजट केवल घोषणाओं तक सीमित न होकर 21वीं सदी की दूसरी तिमाही और आगे के लिए भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला दस्तावेज साबित हो सकता है।



