SIR मामले में चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में बड़ा आरोप, ममता बनर्जी पर भड़काऊ भाषण और डर फैलाने का दावा

SIR मामले में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी पर भड़काऊ भाषण और डर फैलाने का आरोप लगाया। पश्चिम बंगाल में चुनाव अधिकारियों को धमकी और हिंसा का दावा।

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आयोग ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत में दाखिल अपने काउंटर एफिडेविट में दावा किया कि ममता बनर्जी भड़काऊ भाषण देकर डर का माहौल बना रही हैं, जिससे चुनावी अधिकारियों को काम करने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग ने कहा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंसा, डराने-धमकाने और चुनाव अधिकारियों को रोके जाने की घटनाएं सामने आई हैं। आयोग का आरोप है कि राज्य सरकार, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) की शिकायतों के बावजूद चुनाव अधिकारियों के खिलाफ धमकी देने वालों पर एफआईआर तक दर्ज नहीं कर रही है।

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां एसआईआर प्रक्रिया के दौरान चुनावी अधिकारियों को गंभीर रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के चल रही है। एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों से चुनाव अधिकारियों में भय का वातावरण बन गया है। कई अधिकारियों ने यहां तक कि सीईओ को पत्र लिखकर एसआईआर ड्यूटी से हटाने की मांग की है।

24 नवंबर की घटना का जिक्र

आयोग ने 24 नवंबर की एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर भीड़ ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय में घुसने की कोशिश की, तोड़फोड़ की और बाहर से ताला लगा दिया। आयोग का आरोप है कि इस मामले में न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही कोई गिरफ्तारी हुई।

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुरुआत से ही एसआईआर प्रक्रिया का विरोध करती रही हैं। उनका कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी संख्या में वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जिससे तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है।

टीएमसी ने भी चुनाव आयोग पर लगाये गंभीर आरोप

वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी शुक्रवार को चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। पार्टी के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने दावा किया कि एक “खराब और रहस्यमय सॉफ्टवेयर” की वजह से सही मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने कहा कि आयोग के अधिकारियों ने भी अब सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की बात मानी है। गोखले के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी इस मुद्दे को महीनों से उठा रहे हैं।

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