Sonbhadra News-सोनभद्र में आयकर विभाग की अब तक की सबसे हाईटेक व्यापक कार्रवाई ने खनन जगत में हड़कंप मचा गया
Sonbhadra News-जिले में खनन कारोबार को लेकर चल रही आयकर विभाग की कार्रवाई अब तक की सबसे व्यापक और हाईटेक जांच के रूप में सामने आई है। ड्रोन कैमरों और सैटेलाइट तकनीक के जरिए खदानों की जियो-मैपिंग की जा रही है, वहीं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर स्वीकृत सीमा और वास्तविक खुदाई की गहराई का मिलान किया जा रहा है। शादी समारोह के स्टिकर लगी गाड़ियों से शुरू हुआ यह गोपनीय ऑपरेशन अब खुलकर प्रदेश की बड़ी तकनीकी जांच में बदल चुका है।
आयकर विभाग की टीम ने जिला खनिज विभाग से प्राप्त पट्टों के दस्तावेजों को आधार बनाकर खनन क्षेत्रों का तकनीकी सत्यापन शुरू किया है। सूत्रों के अनुसार शिकायत मिली थी कि कुछ खदानों में निर्धारित मानकों से अधिक गहराई तक खनन किया गया। इसी आधार पर प्रदेशभर में एक साथ कार्रवाई की गई, जिसमें सोनभद्र सबसे बड़े फोकस पर रहा।
करीब 25 वाहनों के काफिले के साथ पहुंचे अधिकारियों ने पहले चरण में आधा दर्जन से अधिक खनन कारोबारियों के आवास और प्रतिष्ठानों पर दबिश दी। मिशन को गोपनीय बनाए रखने के लिए कई वाहनों पर शादी समारोह के स्टिकर और पंपलेट लगाए गए थे, ताकि किसी को भनक न लगे। प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड नंबर प्लेट वाली गाड़ियां भी कार्रवाई में शामिल रहीं।
यह पूरी कार्रवाई वाराणसी जोन के ज्वाइंट डायरेक्टर प्रांजल सिंह के नेतृत्व में चल रही है। प्रदेश में 20 से 22 स्थानों पर छापेमारी की जा रही है, जबकि अकेले सोनभद्र में लगभग 14 ठिकानों को जांच के दायरे में लिया गया है। करीब 100 से अधिक अधिकारी अलग-अलग टीमों में बंटकर कार्रवाई कर रहे हैं।
टीम ने पत्थर की खदानों का स्थलीय निरीक्षण किया और ड्रोन की मदद से पूरे एरिया की सैटेलाइट व जीपीएस मैपिंग कराई। डिजिटल डेटा के आधार पर वास्तविक खनन और स्वीकृत सीमा का मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों ने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार किया, लेकिन पुष्टि की कि शिकायतों के आधार पर मानक-विहीन खनन की जांच जारी है।
जांच के दौरान ओबरा थाना क्षेत्र समेत कई इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात रहा। छात्र शक्ति डाला लंगड़ा मोड़ स्थित तीन नंबर की बंद खदान, जिसका संबंध बसपा विधायक उमाशंकर सिंह से बताया जा रहा है, वहां भी टीम ने पहुंचकर दस्तावेजों की पड़ताल की।
सूत्रों के मुताबिक यदि किसी खदान संचालक या कारोबारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल खनन क्षेत्र में सन्नाटा पसरा है और पूरे प्रदेश की निगाहें इस हाईटेक जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
सबसे बड़ा सवाल अब यही है, क्या यह सिर्फ टैक्स जांच है या अवैध खनन पर बड़ा शिकंजा? और अगर गड़बड़ी साबित होती है, तो क्या बड़े नामों पर भी कार्रवाई होगी?
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रिपोर्ट अमित मिश्रा, सोनभद्र



