‘No More War’ Movie:झारखंड की शॉर्ट फिल्म ‘नो मोर वॉर’ को अंतरराष्ट्रीय पहचान, कोलकाता-श्रीलंका फिल्म फेस्टिवल में हुआ चयन

'No More War': Jharkhand's short film 'No More War' gets international recognition, selected for Kolkata-Sri Lanka Film Festival

‘No More War’:झारखंड के फिल्मकारों के लिए गर्व की बात है कि नौरस फिल्म प्रोडक्शन के बैनर तले निर्मित शॉर्ट फिल्म ‘नो मोर वॉर’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। फिल्म का चयन प्रतिष्ठित विवेकानंद इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, कोलकाता और श्रीलंका इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है। इस उपलब्धि से राज्य की फिल्म प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।

फिल्म के लेखक और निर्देशक अमित अक्षत ने रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि विवेकानंद इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के तहत फिल्म का प्रदर्शन 21 जून को कोलकाता के साइंस सिटी में आयोजित समारोह के दौरान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्मकार के लिए अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी कृति का चयन होना बड़ी उपलब्धि होती है और यह फिल्म की विषयवस्तु की प्रासंगिकता को भी दर्शाता है।

अमित अक्षत के अनुसार, ‘नो मोर वॉर’ का मूल उद्देश्य युद्ध, हिंसा और संघर्ष की मानसिकता के विरुद्ध शांति, प्रेम और मानवता का संदेश देना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह विषय और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। उन्हें उम्मीद है कि फिल्म का संदेश अंतरराष्ट्रीय मंचों के माध्यम से दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचेगा और लोगों को शांति तथा सह-अस्तित्व के महत्व पर विचार करने के लिए प्रेरित करेगा।

फिल्म की कहानी 10 वर्षीय बालक शुभ के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने जन्मदिन के अवसर पर वह समाचारों में युद्ध, हिंसा और मानवीय त्रासदी के दृश्य देखकर मानसिक रूप से विचलित हो जाता है। इसी बीच जब उसके पिता उसे उपहार स्वरूप एक खिलौना बंदूक देते हैं, तो वह उसे स्वीकार करने से इनकार कर देता है। बच्चे की यह प्रतिक्रिया फिल्म के केंद्रीय संदेश को सामने लाती है कि मानव जीवन का उद्देश्य युद्ध और हथियार नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारा, संवेदनशीलता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व है।

फिल्म अपने सरल लेकिन प्रभावशाली कथानक के माध्यम से दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हिंसा और युद्ध का सबसे अधिक प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। यही कारण है कि फिल्म शांति और मानवीय मूल्यों की वकालत करती नजर आती है।

फिल्म में श्रेष्ठ, मनोज सहाय, मेहुल प्रसाद, संदिपिका रॉय और अवनीश भारद्वाज ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने कहानी को प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारने में अहम योगदान दिया है। वहीं नीरज और सुमित की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के दृश्य पक्ष को मजबूती प्रदान करती है। सचिन महली ने संगीत और संपादन की जिम्मेदारी संभाली है, जिसने फिल्म को तकनीकी रूप से और अधिक प्रभावशाली बनाया है।

फिल्म के अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में चयन से झारखंड के स्वतंत्र फिल्म निर्माण क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिली है। फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियां राज्य की रचनात्मक प्रतिभाओं को वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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