adevertisment Adevertiisment banner

ब्राह्मण सम्मेलन के बाद सपा की अंदरूनी राजनीति फिर चर्चा में

ब्राह्मण सम्मेलन में सांसद रुचि वीरा की मौजूदगी रही, लेकिन जिले के चारों विधायक कार्यक्रम से दूर रहे। गैरहाजिरी को लेकर संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल पर सवाल उठने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। मुरादाबाद में आयोजित ब्राह्मण सम्मेलन में पार्टी की सांसद रुचि वीरा तो पहुंचीं, लेकिन जिले के चारों विधायक कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर समन्वय और एकजुटता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

सम्मेलन में सांसद मौजूद, विधायक रहे गायब

मुरादाबाद के बुद्धि विहार में आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में सांसद सनातन पांडेय शामिल हुए। मंच पर सांसद रुचि वीरा भी मौजूद रहीं, लेकिन कांठ, मुरादाबाद देहात, बिलारी और ठाकुरद्वारा विधानसभा क्षेत्रों के विधायक कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

चारों विधायकों की गैरमौजूदगी के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या यह महज संयोग था या पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों का संकेत।

विधायकों की अनुपस्थिति पर अलग-अलग दावे

पार्टी जिलाध्यक्ष का कहना है कि सभी जनप्रतिनिधियों को कार्यक्रम की सूचना भेजी गई थी। उनके अनुसार, कुछ विधायक अन्य कार्यक्रमों या निजी व्यस्तताओं के कारण नहीं आ सके।

हालांकि, एक विधायक ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की व्यक्तिगत जानकारी नहीं मिली थी, जबकि दूसरे विधायक ने बताया कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी तो थी, लेकिन तारीख को लेकर भ्रम था। एक अन्य विधायक की गैरहाजिरी को लेकर संगठन भी स्पष्ट कारण नहीं बता सका।

इन अलग-अलग बयानों ने संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी।

पहले भी सामने आ चुके हैं मतभेद

यह पहला मौका नहीं है जब समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों में असहमति की तस्वीर सामने आई हो। इससे पहले भी कई आयोजनों में वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी या नाराजगी चर्चा का विषय बनी थी।

पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में टिकट की मांग, मंच पर प्रतिनिधित्व और नेताओं को निमंत्रण नहीं मिलने जैसे मुद्दों को लेकर भी विवाद सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं के चलते पार्टी नेतृत्व को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

UP Politics: मौलाना जरजिस अंसारी के बयान पर लखनऊ में पोस्टर विवाद, BJP ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर उठाए सवाल

2027 चुनाव से पहले बढ़ी चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी इस समय अलग-अलग सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में यदि संगठन और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठते रहे, तो इसका असर चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।

हालांकि, पार्टी की ओर से फिलहाल इसे सामान्य स्थिति बताया जा रहा है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।

Related Articles

Back to top button