Dharmendra Pradhan Parliament: इस्तीफे के बाद पहली बार संसद पहुंचे धर्मेंद्र प्रधान, NDA सांसदों ने मिथिला टोपी पहनाकर किया स्वागत
संसद परिसर में NDA सांसदों ने गर्मजोशी से किया स्वागत, दूसरी ओर प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने किया विरोध प्रदर्शन
Dharmendra Pradhan Parliament: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को पहली बार संसद पहुंचे। संसद परिसर में उनके पहुंचते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने गर्मजोशी के साथ उनका स्वागत किया। इस दौरान उन्हें मिथिला की पारंपरिक टोपी और सम्मान स्वरूप पटका पहनाया गया। स्वागत के बाद कई सांसद उनके साथ संसद भवन के भीतर गए।
संसद के मकर द्वार पर हुए इस स्वागत को भाजपा और एनडीए सांसदों ने धर्मेंद्र प्रधान के प्रति सम्मान और समर्थन का प्रतीक बताया। सांसदों ने उनसे मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया और उनके योगदान की सराहना की। इस दौरान वहां मौजूद कई सांसदों ने उनसे बातचीत भी की।
दूसरी ओर संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन भी जारी रहा। कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, शिक्षा व्यवस्था और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की गतिविधियां एक साथ देखने को मिलीं।
गौरतलब है कि धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों का आंदोलन कई दिनों तक चला, जिसमें शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख मुद्दा बनी हुई थी। इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई थी।
अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि वे पिछले चार दशकों से छात्र हित, शिक्षा और शिक्षा सुधार के लिए लगातार कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि नीट-यूजी परीक्षा में गड़बड़ियों की खबर सामने आने के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे।
उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने का प्रयास किया, जिससे हालात और जटिल हुए। उनके अनुसार, वे नहीं चाहते थे कि छात्रों का भविष्य लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझे या आंदोलन का फायदा कोई असामाजिक अथवा राष्ट्रविरोधी तत्व उठाए। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया।
संसद में उनकी वापसी और एनडीए सांसदों द्वारा किए गए स्वागत को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और नीट विवाद को लेकर सरकार पर हमलावर बना हुआ है। ऐसे में संसद के भीतर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।


