Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफे के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘Gen Z के कुछ बच्चों को गुमराह किया गया’
NEET विवाद के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मामला नहीं था। उन्होंने Gen Z की चिंताओं, छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था पर खुलकर बात की।
Dharmendra Pradhan Resignation: NEET-UG परीक्षा विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार खुलकर अपनी चुप्पी तोड़ी है। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद अपने पहले सार्वजनिक बयान में प्रधान ने Gen Z यानी नई पीढ़ी को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि कुछ लोगों ने नई पीढ़ी के बच्चों को गुमराह किया और उनके असंतोष को एक अलग दिशा देने की कोशिश की। धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत सम्मान या पद की प्रतिष्ठा का सवाल नहीं था, बल्कि उनका उद्देश्य छात्रों के हितों और देश की युवा पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखना था।
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक, NEET विवाद के दौरान जिस तरह से घटनाक्रम आगे बढ़ा, उससे उन्हें लगा कि छात्रों की वास्तविक चिंताओं के बीच कुछ लोग राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि Gen Z उनके लिए अपने बच्चों की तरह है और वह नहीं चाहते थे कि युवाओं की नाराजगी को किसी राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाए। प्रधान ने दावा किया कि इसी सोच के तहत उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनसे Gen Z की भावनाओं और आकांक्षाओं को समझने तथा उन्हें सीधे संबोधित करने का आग्रह किया।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने अपनी बात रखते हुए यह भी कहा था कि उन्हें युवाओं के सामने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने का अवसर दिया जाए। उनके मुताबिक, उन्होंने कभी अपने व्यक्तिगत सम्मान को इस पूरे मामले से ऊपर नहीं रखा। उनका जोर इस बात पर था कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में युवाओं का भरोसा कायम रहना चाहिए।
NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों के बीच नाराजगी देखने को मिली थी। परीक्षा प्रक्रिया, पेपर लीक और परिणाम से जुड़े विवादों ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर भी सवाल खड़े किए। मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI को सौंपी गई। विवाद के बाद परीक्षा प्रक्रिया में कई बदलाव किए गए और प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा की व्यवस्था भी की गई। धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे के संदर्भ में कहा कि सरकार ने शिकायतें सामने आने के बाद कार्रवाई करने में देरी नहीं की और उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि किसी भी योग्य छात्र का भविष्य परीक्षा प्रणाली की खामियों के कारण प्रभावित न हो।
अपने बयान में धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही इस मामले की जिम्मेदारी ली थी। उन्होंने कहा कि वह कभी भी स्थिति से पीछे नहीं हटे। उनका कहना था कि जब कोई बड़ी समस्या सामने आती है तो जिम्मेदारी से बचने के बजाय उसका सामना करना जरूरी होता है। उनके अनुसार, उन्होंने इसी भावना के साथ पूरे मामले को संभालने की कोशिश की।
धर्मेंद्र प्रधान के बयान में देश की युवा आबादी को लेकर भी खास जोर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि भारत में हर साल करीब दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं और एक दशक में यह संख्या युवाओं की एक बड़ी आबादी में बदल जाती है। यही युवा भारत के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भारत को वैश्विक स्तर पर बड़ी भूमिका निभानी है और इस लक्ष्य को हासिल करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश की युवा पीढ़ी के कंधों पर होगी।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि Gen Z को केवल विरोध या आंदोलन के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इस पीढ़ी की अपनी आकांक्षाएं, सवाल और भविष्य को लेकर चिंताएं हैं। सरकार और राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं की आवाज को सुने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करे। प्रधान के मुताबिक, यदि युवाओं की वास्तविक समस्याओं को राजनीतिक हितों से जोड़ दिया जाता है तो इसका नुकसान अंततः छात्रों और देश दोनों को हो सकता है।
विपक्ष की ओर से धर्मेंद्र प्रधान और केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठाए गए थे। विपक्षी नेताओं ने NEET विवाद को लेकर सरकार की कार्यशैली और छात्र आंदोलनों से निपटने के तरीके की आलोचना की थी। कुछ नेताओं ने प्रधान पर ओडिशा और देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया। इन आरोपों पर जवाब देते हुए प्रधान ने कहा कि उन्होंने कभी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे ओडिशा के लोगों को शर्मिंदा होना पड़े और वह राज्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कोई कदम नहीं उठा सकते।
धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब NEET विवाद और शिक्षा व्यवस्था को लेकर युवाओं के बीच भरोसे का सवाल अभी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। उनका यह कहना कि ‘कुछ लोगों ने Gen Z को गुमराह किया’ आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा को और तेज कर सकता है। वहीं, उनका यह दावा कि इस्तीफा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं था, बल्कि छात्रों के हितों को प्राथमिकता देने का फैसला था, उनके इस्तीफे को लेकर नई बहस को जन्म देता है।
धर्मेंद्र प्रधान के बयान से एक बात साफ है कि NEET विवाद केवल एक परीक्षा या प्रशासनिक गलती का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि यह सरकार, छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के बीच भरोसे का बड़ा सवाल बन चुका है। अब देखना होगा कि सरकार Gen Z की चिंताओं को किस तरह संबोधित करती है और शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।



