Pappu Yadav: जमुई कांड पर पप्पू यादव का तेजस्वी पर पलटवार, बोले- पहले अपने गिरेबान में झांकें

नाबालिग से बदसलूकी मामले को लेकर बिहार में सियासत तेज, पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के बयान पर दी तीखी प्रतिक्रिया

Pappu Yadav: बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की और उसके साथी के साथ कथित बदसलूकी का मामला अब राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा भी बन गया है। इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन पर ही निशाना साधा है।

पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव और उनके परिवार को लेकर कई तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि दूसरों पर सवाल उठाने से पहले नेताओं को अपने आसपास और अपने राजनीतिक परिवार में झांकना चाहिए। पप्पू यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग दूसरों को नसीहत देते हैं, उन्हें पहले अपने आचरण और अपने नेताओं के बारे में भी जवाब देना चाहिए।

पप्पू यादव ने तेजस्वी पर क्या कहा?

जमुई मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए और देखना चाहिए कि उनके परिवार तथा राजनीतिक खेमे में किस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे हैं।

उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि कभी लोग भोज में शामिल होने के लिए आरा पहुंचते हैं तो कभी नवादा में होने वाले कार्यक्रमों में जाते हैं। इसी संदर्भ में पप्पू यादव ने तेजस्वी और आरजेडी नेताओं को दूसरों पर टिप्पणी करने से पहले अपने राजनीतिक आचरण पर विचार करने की नसीहत दी।

पप्पू यादव ने आरजेडी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पार्टी की राजनीति में ऐसे लोगों को भी जगह मिलती रही है जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। उन्होंने कहा कि किसी अपराध के लिए सजा की मांग करने से पहले नेताओं को अपने राजनीतिक दल और उससे जुड़े लोगों के रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए। ये आरोप पप्पू यादव के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

तेजस्वी यादव ने जमुई मामले पर क्या कहा था?

जमुई की घटना सामने आने के बाद तेजस्वी यादव ने अपराध में जातीय पहचान को आधार न बनाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अपराध करने वाले व्यक्ति की कोई जाति नहीं होती और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मामले में शामिल सभी आरोपियों को सजा देने की मांग की थी।

तेजस्वी यादव ने इस मामले को लेकर बिहार सरकार की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस्तीफे की मांग की थी।

क्या है जमुई का पूरा मामला?

पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, घटना 19 सितंबर की शाम की है। जमुई में एक नाबालिग लड़का और लड़की कोचिंग से लौट रहे थे। इसके बाद दोनों एक स्थान पर गए थे, जहां रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। सामने आए वीडियो में दोनों के साथ मारपीट और लड़की के साथ कथित बदसलूकी दिखाई देती है। वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।

जमुई पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक वीडियो के आधार पर करीब सात संदिग्धों की पहचान की गई थी। इसके बाद तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया और बाकी आरोपियों की तलाश के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया।

मुख्य आरोपी के पुलिस मुठभेड़ में घायल होने की बात

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य संदिग्धों में शामिल नंदन यादव को पकड़ने की कार्रवाई की। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने बताया कि वह भागने की कोशिश कर रहा था और मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक अन्य आरोपी के भी पुलिस कार्रवाई में घायल होने की रिपोर्ट सामने आई है।

इस कार्रवाई के बाद भी मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। विपक्ष जहां कानून-व्यवस्था और प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार की ओर से कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।

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वायरल वीडियो को लेकर भी पुलिस की कार्रवाई

इस मामले में पुलिस की जांच सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं है। नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने को लेकर भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने ऐसे करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन पर वीडियो प्रसारित करने का आरोप है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का स्वत: संज्ञान लिया और बिहार पुलिस से आरोपियों की गिरफ्तारी तथा जांच की जानकारी मांगी है।

जमुई की घटना पर पुलिस की जांच आगे बढ़ रही है और बाकी संदिग्धों की गिरफ्तारी का प्रयास जारी है। इसी बीच मामले ने बिहार की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का नया दौर शुरू कर दिया है। पप्पू यादव और तेजस्वी यादव की बयानबाजी इसी राजनीतिक विवाद का हिस्सा है।

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