सरकार ने बढ़ाई सप्लाई, फिर भी राहत नहीं
प्याज की कीमतों को काबू में रखने के लिए केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से बड़ी मात्रा में प्याज बाजार में उतारा है। इसके साथ ही ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी विशेष ट्रेनों के जरिए विभिन्न राज्यों और शहरों तक तेजी से सप्लाई पहुंचाई जा रही है, ताकि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके।
इसके अलावा NCCF (नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन) और NAFED (नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन) जैसी सरकारी एजेंसियां भी रियायती दरों पर प्याज उपलब्ध करा रही हैं। कई स्थानों पर मोबाइल वैन और सरकारी आउटलेट्स के जरिए सस्ती दरों पर प्याज बेचा जा रहा है। हालांकि इन प्रयासों के बावजूद बाजार में कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं देखी जा रही।
थोक और खुदरा कीमतों में बना हुआ है बड़ा अंतर
विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज की थोक और खुदरा कीमतों के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है। मंडियों में कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन परिवहन लागत, भंडारण खर्च और स्थानीय बाजार की परिस्थितियों के कारण उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते प्याज काफी महंगा हो जाता है।
यही वजह है कि सरकार द्वारा अतिरिक्त सप्लाई भेजे जाने के बावजूद आम लोगों को राहत महसूस नहीं हो रही। कई शहरों में खुदरा विक्रेता अभी भी ऊंचे दामों पर प्याज बेच रहे हैं।
मानसून और खराब स्टॉक का असर
जानकारों के मुताबिक इस साल मानसून में देरी और कुछ क्षेत्रों में हुई अत्यधिक बारिश ने प्याज उत्पादन को प्रभावित किया है। बारिश के कारण भंडारित रबी प्याज का बड़ा हिस्सा खराब हो गया, जिससे बाजार में उपलब्ध गुणवत्ता वाली प्याज की मात्रा कम हो गई।
रबी फसल आमतौर पर सालभर की प्याज आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होती है। लेकिन इस बार खराब मौसम ने स्टॉक को नुकसान पहुंचाया है। इसके कारण बाजार में सप्लाई दबाव में है और कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
नई खरीफ फसल की आवक में देरी
प्याज की नई खरीफ फसल अभी बड़े पैमाने पर बाजार में नहीं पहुंची है। विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसल की आवक सामान्य से देर से शुरू होगी। जब तक नई फसल पर्याप्त मात्रा में मंडियों तक नहीं पहुंचती, तब तक बाजार पुराने और सीमित स्टॉक पर निर्भर रहेगा।
इसी कारण सितंबर और अक्टूबर के दौरान कीमतों में ज्यादा राहत मिलने की संभावना कम मानी जा रही है।
कब सस्ता हो सकता है प्याज?
कृषि और बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अक्टूबर के आखिर से नवंबर के बीच नई खरीफ फसल की आवक तेज हो सकती है। यदि मौसम अनुकूल रहा और सप्लाई बेहतर हुई, तो बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे कीमतों पर दबाव कम पड़ सकता है और उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सकती है।
हालांकि फिलहाल स्थिति यही संकेत दे रही है कि अगले कुछ हफ्तों तक प्याज के दाम ऊंचे बने रह सकते हैं। ऐसे में आम लोगों को अभी महंगे प्याज के साथ ही अपना घरेलू बजट संभालना पड़ सकता है।