PM Modi: भारत-स्विट्जरलैंड मिलकर बढ़ाएंगे शांति और स्थिरता का प्रयास, मोदी बोले- यूक्रेन हो या पश्चिम एशिया, बातचीत जरूरी

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन के साथ मुलाकात में पीएम मोदी ने व्यापार, निवेश और तकनीक के साथ वैश्विक शांति पर भी जोर दिया।

PM Modi: भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में सोमवार को एक और महत्वपूर्ण कदम देखने को मिला। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुंचे। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ द्विपक्षीय बातचीत की। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी से लेकर वैश्विक शांति और स्थिरता जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

राष्ट्रपति पारमेलिन अपनी पत्नी कैरोलिन पारमेलिन के साथ भारत पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। बाद में हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हुई।

पीएम मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति का किया स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति गाइ पारमेलिन का स्वागत करते हुए भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

मोदी ने भारत और यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन यानी EFTA के बीच हुए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह यूरोप के किसी आर्थिक समूह के साथ भारत का पहला मुक्त व्यापार समझौता है।

भारत और EFTA के बीच समझौते को दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले समय में इस साझेदारी को और व्यापक बनाया जाएगा।

सदियों पुराने संबंधों का भी किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्तों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की मित्रता केवल वर्तमान दौर के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे पुराना जुड़ाव भी रहा है।

मोदी ने स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी के स्विट्जरलैंड से जुड़े प्रसंगों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक यात्राओं और संपर्कों की स्मृतियां आज भी दोनों देशों की मित्रता में दिखाई देती हैं।

प्रधानमंत्री के मुताबिक आज दोनों देशों की साझेदारी में इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीक महत्वपूर्ण आधार बन चुके हैं।

व्यापार और निवेश बढ़ाने पर जोर

द्विपक्षीय बातचीत में आर्थिक सहयोग का मुद्दा भी प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने स्विट्जरलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

इससे भारत के कृषि उत्पादों, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग से जुड़े सामान के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई।

इसके अलावा भारत स्विट्जरलैंड से बायोटेक्नोलॉजी, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने पर भी जोर दे रहा है।

इस लिहाज से दोनों देशों की बातचीत केवल पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रही, बल्कि नई तकनीक और उभरते आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी केंद्रित रही।

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया पर क्या बोले मोदी?

द्विपक्षीय बैठक के दौरान वैश्विक संघर्षों का मुद्दा भी उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, बातचीत और कूटनीति में विश्वास रखते हैं।

मोदी ने कहा कि चाहे यूक्रेन का मामला हो या पश्चिम एशिया का, भारत ने हमेशा शांति के प्रयासों का समर्थन किया है।

प्रधानमंत्री के इस बयान से भारत की उस कूटनीतिक नीति का संकेत मिलता है जिसमें सैन्य टकराव की जगह संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की जरूरत है। भारत लंबे समय से वैश्विक संस्थानों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की बात करता रहा है।

भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी का बढ़ता दायरा

भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध अब व्यापार और वित्त से आगे बढ़कर तकनीक, इनोवेशन, विज्ञान और निवेश जैसे क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए EFTA समझौता भी अहम भूमिका निभा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पारमेलिन की बातचीत से यह संकेत मिला कि दोनों देश आने वाले समय में आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ वैश्विक मुद्दों पर भी सहयोग बढ़ाने के इच्छुक हैं।

एक तरफ भारत स्विट्जरलैंड के बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं स्विस निवेश को भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में आकर्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।

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वैश्विक शांति पर साझा संदेश

मोदी और पारमेलिन की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव जारी है। ऐसे माहौल में भारत और स्विट्जरलैंड का बातचीत, कूटनीति और कानून के शासन के जरिए वैश्विक समस्याओं के समाधान पर जोर देना महत्वपूर्ण है।

दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक रिश्तों के साथ शांति और स्थिरता के मुद्दे पर सहयोग का संदेश भी इस बैठक की बड़ी बात रही। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बीच संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देता रहेगा।

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों को आर्थिक और रणनीतिक दोनों स्तरों पर नई गति मिलने की उम्मीद है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि बैठक में बनी सहमति किस तरह व्यापार, निवेश, तकनीक और वैश्विक सहयोग के ठोस कार्यक्रमों में बदलती है।

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