Marhara Assembly Seat: मारहरा में BJP की दोहरी बढ़त के बाद 2024 में बदले समीकरण, 2027 से पहले सपा की नजर शाक्य वोटों पर

Marhara Assembly Seat: मारहरा में 2022 से 2024 तक बदला वोटों का अंतर, 2027 में फिर आमने-सामने हो सकती है भाजपा-सपा

Marhara Assembly Seat: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। एटा जिले की मारहरा विधानसभा सीट पर पिछले दो चुनावों के आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए अहम हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यहां जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में एटा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मारहरा विधानसभा खंड में भी भाजपा को सबसे अधिक वोट मिले, लेकिन समाजवादी पार्टी (सपा) ने अंतर काफी कम कर दिया।

2022 में भाजपा प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह लोधी ने सपा के अमित गौरव यादव को 17,609 वोटों से हराया था। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में मारहरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के राजवीर सिंह को 93,724 और सपा के देवेश शाक्य को 90,889 वोट मिले। इस तरह दोनों दलों के बीच अंतर 2,835 वोट रहा। हालांकि, विधानसभा और लोकसभा चुनाव अलग-अलग परिस्थितियों में होते हैं, इसलिए इन नतीजों को सीधे 2027 के परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता। <Cite refs={[“turn713898search0″,”turn713898search2”]}/>

2012 में सपा, 2017 और 2022 में भाजपा ने दर्ज की जीत

मारहरा विधानसभा सीट का चुनावी इतिहास पिछले तीन विधानसभा चुनावों में अलग-अलग राजनीतिक परिस्थितियों को दर्शाता है। वर्ष 2012 में सपा के अमित गौरव यादव ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा के उम्मीदवार विजयी रहे।

2022 के चुनाव में भाजपा के वीरेंद्र सिंह लोधी को 1,01,387 वोट मिले, जबकि सपा के अमित गौरव को 83,778 वोट हासिल हुए। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के योगेश कुमार 16,900 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस की प्रत्याशी तारा राजपूत को 852 वोट मिले। <Cite refs={[“turn713898search0″,”turn713898search4”]}/>

2022 में भाजपा और सपा के बीच कितना था अंतर?

2022 के विधानसभा चुनाव में मारहरा सीट पर भाजपा और सपा के बीच वोटों का अंतर 17,609 रहा था। भाजपा को करीब 49 प्रतिशत और सपा को लगभग 40.5 प्रतिशत वोट मिले थे। बसपा का मत प्रतिशत करीब 8.2 रहा।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि भाजपा और सपा के बीच मुख्य मुकाबला था, जबकि बसपा को भी उल्लेखनीय संख्या में वोट मिले। उस चुनाव में भाजपा की जीत का अंतर 2024 के लोकसभा चुनाव में मारहरा विधानसभा खंड के नतीजों से काफी अधिक था। <Cite refs={[“turn713898search0″,”turn713898search1”]}/>

2024 में भाजपा-सपा के बीच घटा अंतर

2024 के लोकसभा चुनाव में एटा सीट पर भाजपा ने राजवीर सिंह और सपा ने देवेश शाक्य को उम्मीदवार बनाया था। मारहरा विधानसभा खंड के परिणाम में भाजपा को 93,724 वोट मिले, जबकि सपा को 90,889 वोट हासिल हुए। बसपा के मोहम्मद इरफान को 13,139 वोट मिले।

इस तरह भाजपा और सपा के बीच अंतर 2,835 वोट रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले यह काफी कम था। हालांकि, दोनों चुनावों में उम्मीदवारों, चुनाव के मुद्दों और मतदान के माहौल में अंतर था। इसलिए वोटों के इस बदलाव को किसी एक जातीय समूह या कारण से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रमाण की जरूरत होगी। <Cite refs={[“turn713898search2″,”turn713898search4”]}/>

शाक्य मतदाताओं की भूमिका पर क्यों हो रही चर्चा?

मारहरा के चुनावी समीकरणों में लोधी, यादव, शाक्य, मुस्लिम और अनुसूचित जाति समुदायों के मतदाताओं की भूमिका को लेकर चर्चा होती रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने देवेश शाक्य को उम्मीदवार बनाया था, जबकि भाजपा के राजवीर सिंह लोधी प्रत्याशी थे।

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषण में यह तर्क दिया जा रहा है कि शाक्य मतदाताओं के एक हिस्से का सपा की ओर जाना पार्टी के वोट बढ़ने की वजह हो सकता है। लेकिन उपलब्ध कुल मतों से यह साबित नहीं होता कि किसी समुदाय ने किस अनुपात में किस दल को वोट दिया। इसके लिए बूथवार आंकड़ों और अन्य विश्वसनीय चुनावी साक्ष्यों की जरूरत होगी।

2027 के चुनाव में भी उम्मीदवारों का चयन, स्थानीय मुद्दे, संगठन की सक्रियता और मतदाताओं की प्राथमिकताएं महत्वपूर्ण रहेंगी।

जातीय समीकरणों में किन समुदायों की चर्चा?

मारहरा क्षेत्र के जातीय समीकरणों पर आधारित अनुमान में लोधी, यादव, अनुसूचित जाति, मुस्लिम और शाक्य समुदायों के साथ ठाकुर, ब्राह्मण, निषाद, नाई और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं का उल्लेख किया जाता है।

मूल रिपोर्ट में दिए गए अनुमान के अनुसार, लोधी मतदाताओं की संख्या करीब 75 हजार, यादव मतदाताओं की 60 हजार, अनुसूचित जाति समुदाय की 50 हजार, मुस्लिम मतदाताओं की 25 हजार और शाक्य मतदाताओं की करीब 22 हजार बताई गई है।

ये आंकड़े अनुमानित हैं, आधिकारिक जातिवार मतदाता गणना नहीं। इन्हें प्रमाणित जनगणना या निर्वाचन आयोग के आधिकारिक जातिवार आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

एसआईआर के बाद 22,340 मतदाता घटने का दावा

मूल रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मारहरा विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 2,92,905 रह गई, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव के समय यह संख्या 3,15,245 बताई गई थी। इस आधार पर 22,340 मतदाताओं की कमी का दावा किया गया है।

मतदाता सूची के पुनरीक्षण में नाम जोड़ने, हटाने और विवरणों में सुधार जैसी प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इस अंतर को समझने के लिए संबंधित मतदाता सूचियों की तारीख, अंतिम प्रकाशित सूची और निर्वाचन अधिकारियों के आंकड़ों का मिलान जरूरी है। मतदाता संख्या में कमी को अपने आप किसी दल के लाभ या नुकसान से जोड़ना उचित नहीं होगा।

2027 से पहले दलों के सामने क्या होंगे मुद्दे?

मारहरा में पिछले चुनावों के परिणाम बताते हैं कि भाजपा और सपा के बीच मुकाबले का अंतर दो चुनावों में अलग-अलग रहा। भाजपा ने 2022 के विधानसभा चुनाव में स्पष्ट अंतर से जीत दर्ज की, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में मारहरा विधानसभा खंड में दोनों दलों के बीच अंतर कम रहा।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रत्याशी चयन, स्थानीय विकास, रोजगार, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, किसानों से जुड़े मुद्दे और मतदाता सूची की स्थिति जैसे पहलू चर्चा में रह सकते हैं। जातीय समीकरणों को लेकर लगाए जा रहे अनुमानों के साथ यह भी देखना होगा कि विभिन्न समुदायों के मतदाता स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों के आधार पर क्या रुख अपनाते हैं।

फिलहाल, 2022 और 2024 के नतीजे मारहरा के राजनीतिक परिदृश्य को समझने का आधार देते हैं। लेकिन 2027 का परिणाम पहले से तय नहीं माना जा सकता। आने वाले समय में दलों की रणनीति, उम्मीदवारों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं से चुनावी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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