Asaduddin Owaisi on SIR: SIR पर विपक्ष के प्रदर्शन से ओवैसी ने बनाई दूरी, बोले- INDIA ब्लॉक से कोई लेना-देना नहीं, शिकायत PM मोदी से है
AIMIM प्रमुख ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन से दूरी स्पष्ट की और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने की मांग उठाई।
Asaduddin Owaisi on SIR: AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शन पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन उनका INDIA ब्लॉक से कोई लेना-देना नहीं है। ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी सवाल उठाते हुए उसमें बदलाव की मांग की। वहीं, विपक्षी नेताओं के भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से मुलाकात के मुद्दे पर उन्होंने शक्तियों के बंटवारे का हवाला देते हुए अपनी अलग राय रखी।
INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन से ओवैसी ने बनाई दूरी
SIR के विरोध में INDIA ब्लॉक के नेताओं की ओर से किए जा रहे प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लोग अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने के लिए स्वतंत्र हैं।
हालांकि, ओवैसी ने इस प्रदर्शन से अपनी राजनीतिक दूरी स्पष्ट कर दी। उन्होंने कहा कि उनका INDIA ब्लॉक से कोई संबंध नहीं है और वह उसके कार्यक्रम पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। उनके मुताबिक, विपक्षी दल अपना कार्यक्रम जारी रख सकते हैं।
ओवैसी के इस बयान से साफ है कि SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर उनकी राय को INDIA ब्लॉक के विरोध प्रदर्शन से अलग करके देखा जाना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन विपक्षी गठबंधन की रणनीति या कार्यक्रम का हिस्सा होने से इनकार किया।
‘हमें प्रधानमंत्री मोदी से शिकायत है’
INDIA ब्लॉक के नेताओं की भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की चर्चा पर ओवैसी ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सांसद विधायिका का हिस्सा हैं और यह समझना जरूरी है कि विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका की भूमिकाएं अलग-अलग हैं।
ओवैसी ने कहा कि अगर उन्हें कोई शिकायत है, तो वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है। उन्होंने तर्क दिया कि संवैधानिक संस्थाओं के बीच शक्तियों का बंटवारा बनाए रखना जरूरी है।
इस संदर्भ में उन्होंने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से जुड़ी स्थायी समिति की सुप्रीम कोर्ट से मुलाकात की कोशिश का भी उल्लेख किया। ओवैसी के मुताबिक, इस तरह की मुलाकातों को लेकर शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर सवाल उठाए गए थे। उन्होंने संकेत दिया कि संवैधानिक संस्थाओं के बीच संवाद और मुलाकातों के मामले में समान मानदंडों पर विचार किया जाना चाहिए।
उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
CEC की नियुक्ति से जुड़े कानून में बदलाव की मांग
असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने इस कानून के प्रावधानों को खत्म करने या बदलने की मांग की और कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना चाहिए।
ओवैसी के प्रस्ताव के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका होनी चाहिए। उनका मानना है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर उठने वाले सवालों का समाधान करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग ओवैसी का राजनीतिक और संस्थागत दृष्टिकोण है। मौजूदा कानूनी व्यवस्था में बदलाव के लिए संबंधित संवैधानिक और विधायी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।
SIR को लेकर क्यों बढ़ रही है राजनीतिक बहस?
मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR इन दिनों राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग की भूमिका और नियुक्ति प्रक्रिया पर भी राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
ओवैसी के बयान में दो अलग-अलग बातें प्रमुखता से सामने आईं। पहली, उन्होंने विरोध प्रदर्शन को नागरिकों का अधिकार बताया, लेकिन INDIA ब्लॉक से अपनी दूरी स्पष्ट की। दूसरी, उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव और संवैधानिक संस्थाओं के बीच शक्तियों के संतुलन पर जोर दिया।
इस तरह SIR के मुद्दे पर ओवैसी ने विपक्षी दलों के प्रदर्शन का हिस्सा बने बिना अपनी मांगें सामने रखीं। अब इस बहस में आगे क्या राजनीतिक और कानूनी कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।



