New Delhi News-दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहा बोरा की याचिका की खारिज, शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड नोटिस को दी थी चुनौती
New Delhi News – Delhi High Court dismisses Neha Bora’s plea; she had challenged a bond notice issued to maintain peace.
New Delhi News-दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को झटका देते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने संबंधी जारी नोटिस को अदालत में चुनौती दी थी। मामले में गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को अदालत ने याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया।
नेहा बोरा की याचिका भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत जारी नोटिस से संबंधित थी। इन प्रावधानों के तहत शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने कानूनी आपत्ति जताई थी।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के मुताबिक, नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में आयोजित एक सभा के दौरान हिरासत में लिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और बाद में आरके पुरम थाने में रातभर रखा गया। उनके मुताबिक, अगले दिन सुबह करीब छह बजे उन्हें रिहा किया गया।
प्रशासन की ओर से जारी नोटिस में मंडी हाउस में नारेबाजी, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद जंतर-मंतर के आसपास विरोध प्रदर्शन और कनॉट प्लेस में लोगों को प्रदर्शन के लिए प्रेरित करने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया था।
नेहा बोरा ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि नोटिस में शांति भंग होने की आशंका के संबंध में पर्याप्त आधार स्पष्ट नहीं किए गए हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया था कि संभावित घटना, उससे जुड़ी परिस्थितियों और संबंधित समयावधि का स्पष्ट विवरण नोटिस में नहीं दिया गया।
कोर्ट में नेहा बोरा ने क्या कहा था?
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान नेहा बोरा की ओर से अदालत में कहा गया कि वह कनॉट प्लेस में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से आयोजित राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम से जुड़ी नहीं थीं।
उनकी ओर से दलील दी गई कि 16 अक्टूबर को उन्होंने ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया था। उन्होंने सीजेपी के कार्यक्रम और उसके आह्वान में अपनी भूमिका होने से इनकार किया।
नेहा बोरा की ओर से यह भी कहा गया कि देश में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए उन्हें किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, अदालत ने सभी दलीलों पर विचार करने के बाद शुक्रवार को याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर हाईकोर्ट की कार्यवाही समाप्त हो गई है। मामले में अदालत के फैसले का पूरा प्रभाव संबंधित कानूनी प्रक्रिया और आदेश की शर्तों के आधार पर समझा जाएगा।



