Chinese Manja Ban : ‘पतंग या मौत का खेल?’, चाइनीज मांझा पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का मानवीय फैसला
Chinese Manja Ban : चाइनीज मांझा पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, यूपी में निर्माण, बिक्री और उपयोग पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध के आदेश, मानव व पक्षियों की सुरक्षा पर जोर।
Chinese Manja Ban : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने चाइनीज मांझा को लेकर एक बार फिर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पूरे उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर तत्काल और पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए। हाई कोर्ट ने साफ कहा कि चाइनीज मांझा न केवल मानव जीवन बल्कि पक्षियों और जानवरों के लिए भी अत्यंत घातक है।
यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने जौनपुर के अधिवक्ता हिमांशु श्रीवास्तव एवं दो अन्य द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2015 में भी चाइनीज मांझा पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका प्रभावी अनुपालन नहीं किया गया, जिसके चलते बार-बार जनहित याचिकाएं दाखिल हो रही हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पूर्व आदेशों का पालन कराना राज्य सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
हाई कोर्ट ने विशेष रूप से कहा कि पतंगबाजी के मौसम में प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि चाइनीज मांझा रेजर की तरह धारदार होता है और कपड़ों के आर-पार शरीर के किसी भी हिस्से को काट सकता है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शिवा प्रिया प्रसाद ने कोर्ट को बताया कि चाइनीज मांझा बनाने में धागा, शीशे का पाउडर और गोंद का उपयोग किया जाता है, जिससे यह बेहद जानलेवा बन जाता है। इससे अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है।
कोर्ट को बताया गया कि 11 दिसंबर 2025 को जौनपुर में शास्त्री ब्रिज पर अपनी बेटी को स्कूल छोड़कर लौट रहे शिक्षक संदीप तिवारी की चाइनीज मांझा से गला कटने के कारण मौत हो गई थी। इससे पहले 15 सितंबर 2015 को भी उत्तम दुबे की इसी तरह मृत्यु हो चुकी है।
न्यायालय ने कहा कि मानव जीवन, पशु-पक्षियों की सुरक्षा को देखते हुए चाइनीज मांझा पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और राज्य सरकार को तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी।



