‘शंकराचार्य कौन होगा यह राष्ट्रपति भी तय नहीं कर सकते’, नोटिस पर भड़के अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

माघ मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भड़क गए। बोले– शंकराचार्य कौन होगा यह न प्रशासन तय करेगा और न ही राष्ट्रपति।

प्रयागराज। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने माघ मेला प्रशासन द्वारा जारी नोटिस पर कड़ी आपत्ति जताई है। नोटिस में उनके द्वारा “शंकराचार्य” पद के उपयोग पर सवाल उठाया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि शंकराचार्य कौन है, यह न प्रशासन तय करता है और न ही मुख्यमंत्री या भारत के राष्ट्रपति को ऐसा कोई अधिकार है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने स्पष्ट कहा कि शंकराचार्य की मान्यता केवल चार पीठों के शंकराचार्य ही तय कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीन में से दो पीठों के शंकराचार्य मुझे शंकराचार्य मानते हैं। पिछले माघ मेले में वे मेरे साथ संगम स्नान भी कर चुके हैं। एक पीठ ने मौन स्वीकृति दी है, ऐसे में यह विषय विवाद का है ही नहीं।

पुरी शंकराचार्य की भूमिका पर सफाई

उन्होंने कहा कि पुरी पीठ के शंकराचार्य ने न तो उनके समर्थन में और न ही विरोध में कोई सार्वजनिक बयान दिया है। “सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट में यह लिखा गया है कि उनसे समर्थन मांगा ही नहीं गया, इसलिए उन्होंने कुछ कहा भी नहीं। ऐसे में विरोध की बात तथ्यहीन है,” स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा।

मौनी अमावस्या पर दुर्व्यवहार का आरोप

शंकराचार्य ने मौनी अमावस्या महास्नान पर्व के दौरान प्रशासन पर दुर्व्यवहार का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें संगम स्नान के लिए जाते समय रोका गया, जिसके बाद वे न तो शिविर में गए और न ही माघ मेला छोड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं न धरने पर हूं और न अनशन पर। हम वहीं बैठे हैं, जहां प्रशासन ने रोकने के बाद हमें छोड़ा था।

प्रशासन से माफी और सम्मानजनक स्नान की मांग

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मांग की कि प्रशासन अपने कृत्य के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना करे और उन्हें ससम्मान संगम स्नान कराया जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे भविष्य में भी मेला क्षेत्र में तो आएंगे, लेकिन शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।

बैरिकेडिंग विवाद पर CCTV फुटेज की मांग

बैरिकेडिंग तोड़ने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शिष्यों ने कोई बैरिकेडिंग नहीं तोड़ी, बल्कि सरकारी कर्मचारियों ने ही रास्ता खुलवाया था। उन्होंने प्रशासन से इस पूरे घटनाक्रम का CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही, शंकराचार्यों और वैष्णव अखाड़ों के लिए अलग संगम स्नान कॉरिडोर बनाने की भी मांग रखी।

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