Azad Aur Azadi Play: आज़ाद और आज़ादी” ने समकालीन चुनौतियों पर उठाए तीखे सवाल
चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती पर एलटीजी ऑडिटोरियम में रंगमंचीय प्रस्तुति, कलाकारों ने इतिहास और वर्तमान के बीच स्थापित किया सशक्त संवाद
Azad Aur Azadi Play: अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद की जयंती के अवसर पर आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन (एएनडब्ल्यूओ) और विराट एक्टिंग लैब के संयुक्त तत्वावधान में मंडी हाउस स्थित एलटीजी ऑडिटोरियम के ब्लैंक कैनवास सभागार में “आज़ाद और आज़ादी” शीर्षक से कविता और कथन आधारित रंगमंचीय प्रस्तुति का आयोजन किया गया। इस प्रस्तुति ने स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा को याद करते हुए समकालीन सामाजिक, राजनीतिक और नैतिक चुनौतियों पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अमित कुमार पांडेय रहे। विशिष्ट अतिथियों में मणिका मल्होत्रा, मणिपुर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री संजीता लिशाम, कवयित्री इन्दु “राज” निगम तथा कवि-शायर राजेन्द्र निगम “राज” शामिल रहे। अतिथियों ने कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि रंगमंच समाज का दर्पण है और इस प्रकार की प्रस्तुतियां लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय विचार को सशक्त बनाने का कार्य करती हैं।
प्रस्तुति में चंद्रशेखर आज़ाद के जीवन और बलिदान को केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उनकी क्रांतिकारी विचारधारा के माध्यम से सामाजिक असमानता, अन्याय, नैतिक पतन, युवाओं के सामने खड़ी चुनौतियों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण जैसे विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया गया। नाटक का संदेश स्पष्ट था कि आज़ादी केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि हर प्रकार के अन्याय, भय और शोषण के खिलाफ सतत संघर्ष का नाम है।
आर्ट्स न्यू वे ऑर्गेनाइजेशन और विराट एक्टिंग लैब ने इस प्रस्तुति के जरिए यह संदेश दिया कि रंगमंच मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और वैचारिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम भी है। दोनों संस्थाएं लगातार ऐसे विषयों पर कार्य कर रही हैं जो समाज को उसकी ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए वर्तमान चुनौतियों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के आयोजक एवं वरिष्ठ समाजसेवी रिज़वान रज़ा ने कहा कि इस प्रस्तुति का उद्देश्य केवल चंद्रशेखर आज़ाद को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि उनके विचारों और संघर्ष की प्रासंगिकता को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि जब तक समाज अन्याय, असमानता और भय के खिलाफ निर्भीक होकर खड़ा नहीं होगा, तब तक आज़ाद के सपनों का भारत अधूरा रहेगा।
प्रस्तुति में अरविंद कुमार, सी.आर. सुरेश, कुलदीप वशिष्ठ, आरव वत्स, प्रेम प्रजापति, राजीव शर्मा और सायरा अली सहित सभी कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय से दर्शकों का मन जीत लिया। विशेष रूप से कुलदीप वशिष्ठ ने चंद्रशेखर आज़ाद के व्यक्तित्व, साहस और वैचारिक प्रतिबद्धता को मंच पर जीवंत कर दिया। अन्य कलाकारों की सशक्त प्रस्तुतियों ने नाटक को भावनात्मक गहराई और कलात्मक ऊंचाई प्रदान की।
नाटक के लेखक, रूपकार एवं निर्देशक आर. एस. विकल ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से यह स्थापित किया कि चंद्रशेखर आज़ाद का संघर्ष केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हर उस दौर के लिए प्रेरणा है जहां अन्याय और असमानता के विरुद्ध आवाज उठाने की आवश्यकता हो। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और वर्तमान समय की चुनौतियों का सामना करने के लिए समाज को उसी साहस और वैचारिक प्रतिबद्धता की जरूरत है।
कार्यक्रम के अंत में दर्शकों ने कलाकारों और आयोजकों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने इसे ऐसी प्रभावशाली सांस्कृतिक प्रस्तुति बताया जिसने इतिहास और वर्तमान के बीच सार्थक संवाद स्थापित करते हुए चंद्रशेखर आज़ाद की विचारधारा को आज के समय में भी जीवंत बनाए रखा।



