Gen Z News : ‘एक से ज्यादा बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड…’, बाबा रामदेव ने Gen Z को लेकर जताई चिंता, शिक्षा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
Gen Z News : बाबा रामदेव ने Gen Z युवाओं को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ युवा हिंसा, धूम्रपान, शराब और अस्थिर रिश्तों में फंस रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

Gen Z News : योग गुरु बाबा रामदेव ने भारत की Gen Z पीढ़ी को लेकर कहा है कि युवाओं को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, बड़ी संख्या में युवा सकारात्मक दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ युवा हिंसा, धूम्रपान, शराब और अस्थिर रिश्तों जैसी समस्याओं में भी फंस रहे हैं।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में रामदेव ने कहा कि Gen Z के कई युवा देश के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने युवाओं में बढ़ती कुछ आदतों और सामाजिक व्यवहार को लेकर चिंता जताई।
‘कुछ युवा हिंसा में शामिल, एक से ज्यादा रिश्तों में’
बाबा रामदेव ने कहा कि कुछ युवा हिंसा में शामिल हो रहे हैं, जबकि कुछ के एक से ज्यादा बॉयफ्रेंड या गर्लफ्रेंड हैं। उन्होंने धूम्रपान और शराब के सेवन को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरी Gen Z को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं है। उनके अनुसार, युवाओं का एक बड़ा वर्ग मेहनत, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों में आगे बढ़ रहा है।
‘भारत में कुछ भी ठीक नहीं हो रहा’ कहने वालों पर निशाना
रामदेव ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जो यह मानते हैं कि देश में कुछ भी सही नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे व्यक्तिगत दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने राजनीतिक नेताओं और उनके समर्थकों से जाति, वर्ग और समुदाय के आधार पर समाज को बांटने से बचने की अपील की।
रामदेव ने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर कहा कि अगर देश किसी नेता को प्रधानमंत्री बनाना चाहता है तो उसे धैर्य रखना चाहिए। उनका इशारा विपक्षी राजनीति और सत्ता की महत्वाकांक्षा की ओर था।
शिक्षा व्यवस्था पर रामदेव की तीखी टिप्पणी
बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई छोटे स्कूलों में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
उनके मुताबिक, कहीं शिक्षक नहीं हैं, कहीं बिजली और पानी की समस्या है तो कहीं शौचालय जैसी जरूरी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने दावा किया कि खराब बुनियादी ढांचे और पढ़ाई के पर्याप्त संसाधन नहीं मिलने के कारण कई छात्र छोटे स्कूल छोड़ रहे हैं।
‘कहीं किताबें हैं तो शिक्षक नहीं’
रामदेव ने शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कहीं किताबें उपलब्ध हैं लेकिन शिक्षक नहीं हैं और कहीं शिक्षक हैं तो किताबें नहीं हैं। उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं को भी गंभीर समस्या बताया।
उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं पर बढ़ती निर्भरता ने छात्रों पर दबाव बढ़ाया है। उनके अनुसार, एडमिशन के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं, जबकि स्कूल स्तर की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाना चाहिए।
10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की भूमिका पर सवाल
रामदेव ने मौजूदा शिक्षा प्रणाली में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए अब कई जगह प्रतियोगी परीक्षाओं का महत्व बढ़ गया है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए संकेत दिया कि अगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वह इस मुद्दे पर आंदोलन या विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपना सकते हैं।



