भगत सिंह के सवाल आज भी प्रासंगिक: एस इरफान हबीब
नई दिल्ली के प्रेस क्लब में ‘मेरे भगत सिंह’ पुस्तक विमोचन समारोह में प्रो. एस इरफान हबीब ने कहा कि भगत सिंह द्वारा उठाए गए जातिवाद और असमानता के सवाल आज भी प्रासंगिक हैं।
नई दिल्ली। “भगत सिंह से पहले और बाद में देश के लिए अनेक लोग शहीद हुए, लेकिन भगत सिंह जैसा गहन विचारक कोई नहीं हुआ। सौ वर्ष पहले उन्होंने जातिवाद, सांप्रदायिकता और आय में असमानता जैसे जिन सवालों को उठाया था, वे आज भी समाज के सामने उसी तरह खड़े हैं।”
ये विचार प्रख्यात इतिहासकार प्रो. एस इरफान हबीब ने नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक विचार गोष्ठी के दौरान व्यक्त किए। कार्यक्रम में पेंगुइन स्वदेश द्वारा प्रकाशित और वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी की पुस्तक ‘मेरे भगत सिंह’ का विमोचन किया गया।
“हर विचारधारा अपने भगत सिंह पर दावा करती है”
इस अवसर पर The Caravan के संपादक हरतोश सिंह बल ने कहा कि आज हर व्यक्ति और हर विचारधारा अपने-अपने तरीके से भगत सिंह पर दावा करती है। “उन्हें कोई नकार नहीं सकता, लेकिन उनके विचारों को पूरी तरह अपनाने वाला कोई नहीं दिखता। भगत सिंह ने अपने अंतिम क्षण तक सवाल करना और सोचना नहीं छोड़ा। मीडिया को लेकर उस समय उन्होंने जो कहा था, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।”
पुस्तक यात्रा और विचार विमर्श
कार्यक्रम की शुरुआत में पेंगुइन स्वदेश की प्रमुख वैशाली माथुर ने संस्थान की प्रकाशन यात्रा पर प्रकाश डाला। पुस्तक के संपादक डॉ. संजीव मिश्रा ने पुस्तक से जुड़े कई रोचक और अनूठे प्रसंग साझा किए।
आयोजन संस्था ‘मध्यप्रदेश परिवार’ की ओर से प्रख्यात चिकित्सक डा. बी.एल. जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। पुस्तक के लेखक पंकज चतुर्वेदी ने पुस्तक की विषय-वस्तु और उसकी समकालीन प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन अर्निबान भट्टाचार्य ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ पत्रकार अरविंद कुमार सिंह ने प्रस्तुत किया।
इस विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भगत सिंह केवल एक क्रांतिकारी नहीं, बल्कि गहरे वैचारिक चिंतक थे, जिनके विचार आज भी सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को दिशा देते हैं।



