Chaitra Navratri 2026 : श्री काशी विश्वनाथ धाम में होंगे विशेष धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन

Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्र 2026 पर काशी विश्वनाथ धाम में विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। नौ दिनों तक दुर्गासप्तशती पाठ, सांस्कृतिक संध्या, माता विशालाक्षी को श्रृंगार अर्पण और रामनवमी पर अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाएगा।

Chaitra Navratri 2026 : Shri Kashi Vishwanath Temple में चैत्र नवरात्र के पावन पर्व पर इस वर्ष विविध धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। मंदिर प्रशासन के अनुसार नवरात्र के नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, सांस्कृतिक संध्याएं और वैदिक अनुष्ठान होंगे, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।

नवरात्र के प्रथम दिन विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी। वहीं पर्व की पूर्व संध्या पर Kashi Vishalakshi Temple शक्तिपीठ से नौ कलश गंगाजल विश्वनाथ धाम लाया जाएगा। अगले दिन प्रातःकाल मंगला आरती के बाद इन्हीं नौ कलशों के गंगाजल से भगवान विश्वेश्वर का जलाभिषेक किया जाएगा।

प्रतिदिन अर्पित होगी शृंगार सामग्री

नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक भगवान विश्वेश्वर की ओर से माता विशालाक्षी को प्रतिदिन वस्त्र और श्रृंगार सामग्री भेंट स्वरूप भेजी जाएगी। इसके साथ ही काशी में विराजमान नवदुर्गा स्वरूप देवियों को भी विश्वनाथ धाम से प्रतिदिन श्रृंगार सामग्री और वस्त्र अर्पित किए जाएंगे।

धाम परिसर में स्थित शिवार्चनम मंच पर नवरात्र के नौ दिनों तक प्रतिदिन सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्ति संगीत और धार्मिक प्रस्तुतियां होंगी। इसके अलावा शक्ति आराधना के अंतर्गत प्रतिदिन दुर्गासप्तशती का शास्त्रीय विधि-विधान से पाठ भी कराया जाएगा।

भक्तों के लिये प्रसाद की व्यवस्था

नवरात्र के दौरान एक दिन काशी की परंपरा के अनुसार माता श्रृंगार गौरी की विशेष आराधना को समर्पित रहेगा। इस अवसर पर धाम में विराजमान माता श्रृंगार गौरी की पूजा काशीवासी और श्रद्धालु मिलकर करेंगे। मंदिर न्यास की ओर से भक्तों के लिए नारियल और फलाहारी प्रसाद की व्यवस्था भी की जाएगी।

वहीं Ram Navami के पावन अवसर पर विश्वनाथ धाम में अखंड रामायण पाठ का आयोजन किया जाएगा। नवरात्र की नवमी तिथि पर नौ मातृ शक्तियों को मुख्य याजक के रूप में आमंत्रित कर नवमी यज्ञ भी संपन्न कराया जाएगा।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि सभी कार्यक्रम काशी की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और वैदिक विधि-विधान के अनुसार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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