Dharmendra Pradhan Resignation: NEET विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, युवाओं को लिखी चिट्ठी में बोले- ’10 दिन से मन दुखी था’

CJP आंदोलन और सरकार से वार्ता के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री का बड़ा फैसला, पत्र में राष्ट्रहित और युवाओं के भविष्य का किया जिक्र

Dharmendra Pradhan Resignation: NEET-UG परीक्षा विवाद और देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा गया उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इस्तीफे के साथ धर्मेंद्र प्रधान ने देश के युवाओं के नाम एक भावुक खुला पत्र भी जारी किया, जिसमें उन्होंने पिछले 10 दिनों की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका मन बेहद दुखी था और उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय लिया।

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले केंद्र सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच करीब 45 मिनट तक अहम बैठक हुई थी। इस बैठक में छात्र आंदोलन और परीक्षा विवाद से जुड़ी प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई थी। हालांकि उस समय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी।

‘यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं’

अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि वह चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा, छात्र हित और शिक्षा सुधारों के लिए कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और उनकी आकांक्षाओं का सम्मान करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।

उन्होंने लिखा कि उनका इस्तीफा किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय है।

NEET विवाद पर क्या कहा?

धर्मेंद्र प्रधान ने पत्र में कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने का भी फैसला किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराना रही।

‘पिछले 10 दिनों से मन दुखी था’

अपने पत्र में उन्होंने लिखा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बेहद व्यथित किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे स्थिति और जटिल होती गई।

धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि उनका उद्देश्य किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य सुरक्षित रखना था और वह नहीं चाहते कि देश की युवा शक्ति भ्रम का शिकार बने।

राष्ट्रहित का हवाला देकर दिया इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जंतर-मंतर सहित देशभर में बनी परिस्थितियों का लाभ कोई राष्ट्रविरोधी ताकत न उठा सके, देश की एकता बनी रहे और छात्रों का भविष्य कानूनी विवादों में न उलझे, इसी सोच के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपने का फैसला किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।

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एक दिन पहले सरकार और CJP के बीच हुई थी अहम बैठक

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले शुक्रवार को केंद्र सरकार और CJP के प्रतिनिधियों के बीच दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। बैठक में सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि CJP का प्रतिनिधित्व आशुतोष रांका और सौरव दास ने किया।

बैठक के दौरान CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • कथित परीक्षा विवाद से प्रभावित परिवारों को ₹1-1 करोड़ का मुआवजा।
  • प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज सभी FIR वापस लेने की मांग।

CJP ने स्पष्ट किया था कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनकी ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांग है।

दो मांगों पर सकारात्मक संकेत

बैठक के बाद CJP नेताओं ने दावा किया था कि सरकार ने दो मांगों—प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने—पर सकारात्मक रुख दिखाया है। हालांकि सरकार की ओर से उस समय इन दावों पर विस्तृत आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी।

उधर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा था कि सरकार को सभी मांगों पर विचार करने के लिए समय चाहिए। वहीं CJP नेताओं का कहना था कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर 24 घंटे का समय मांगा है।

शिक्षा सुधारों का भी किया उल्लेख

अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 सहित शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह भविष्य में भी देश, ओडिशा और भारत के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहेंगे।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन और सरकार के बीच आगे की वार्ता पर सभी की नजरें टिकी हैं। अब यह देखना होगा कि आंदोलन से जुड़ी अन्य मांगों पर सरकार क्या फैसला लेती है और आगे की रणनीति क्या होती है।

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